सुप्रीम कोर्ट ने इच्छा मृत्यु को मंजूरी दी, कहा- ‘लोगों को सम्मान के साथ मरने का पुरा’

सुप्रीम कोर्ट ने इच्छा मृत्यु को मंजूरी दी, कहा- ‘लोगों को सम्मान के साथ मरने का पुरा’

सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने इच्छा मृत्यु को दी मंजूरी दे दी है। माननीय न्यायालय ने शुक्रवार को यह बड़ा फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि लोगों के पास सम्मान से मरने का पूरा हक है।

सुप्रीम कोर्ट ने नियमों के साथ इच्छा मृत्यु की इजाजत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने इच्छामृत्यु के लिए एक गाइडलाइन जारी की है, जो कि कानून बनने तक प्रभावी रहेगी।

दीपक मिश्रा की अगुवाई में पांच जजों की संवैधनिक पीठ ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। दरअसल शीर्ष कोर्ट उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें मरणासन्न व्यक्ति द्वारा इच्छामृत्यु के लिए लिखी गई वसीयत (लिविंग विल) को मान्यता देने की मांग की गई थी।

‘लिविंग विल’ एक लिखित दस्तावेज होता है जिसमें कोई मरीज पहले से यह निर्देश देता है कि मरणासन्न स्थिति में पहुंचने या रजामंदी नहीं दे पाने की स्थिति में पहुंचने पर उसे किस तरह का इलाज दिया जाए।

‘पैसिव यूथेनेशिया’ (इच्छामृत्यु) वह स्थिति है जब किसी मरणासन्न व्यक्ति की मौत की तरफ बढ़ाने की मंशा से उसे इलाज देना बंद कर दिया जाता है।

इससे पहले कोर्ट ने 12 अक्टूबर को फैसला सुरक्षित रखा था। आखिरी सुनवाई में केंद्र ने इच्छा मृत्यु का हक देने का विरोध करते हुए इसका दुरुपयोग होने की आशंका जताई थी।

पिछली सुनवाई में संविधान पीठ ने कहा था कि ‘राइट टू लाइफ’ में गरिमापूर्ण जीवन के साथ-साथ गरिमामय ढंग से मृत्यु का अधिकार भी शामिल है’ ऐसा हम नहीं कहेंगे। हालांकि पीठ ने आगे कहा कि हम ये जरूर कहेंगे कि गरिमापूर्ण मृत्यु पीड़ा रहित होनी चाहिए।

केन्द्र सरकार ने अपने हलफनामे में इच्छा मृत्यु को लेकर सभी बिंदुओं विचार किए जाने और इससे जुड़े सामाजिक संगठनों से सुझाव मांगने की बात कही थी।

बता दें कि एक गैर-सरकारी सामाजिक संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर लिविंग विल का अधिकार दिए जाने की मांग उठाई थी।

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