Sunday , January 21 2018

सुरेश यादव बनाम मिनहाज अंसारी: नाम अलग अंजाम अलग

जहां तक मुझे याद है बालाघाट का आरएसएस प्रचारक सुरेश यादव पहला ऐसा शख़्स है जिसे मुसलमानों को वॉट्सएप पर भला-बुरा कहने और माहौल ख़राब करने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था.
मगर इस कार्रवाई का नतीजा सामने है. एडिशनल एसपी, एसएचओ समेत आठ पुलिस वाले सस्पेंड और अंडरग्राउंड हैं. सभी के ऊपर उन्हीं के थाने में हत्या की कोशिश का मुक़दमा दर्ज है. एसपी, डीआईजी का तबादला हो चुका है. आरएसएस प्रचारक पर कार्रवाई की जांच सीआईडी से करवाई जा रही है. प्रचारक के लिए मीडिया की कैंपेनिंग ऐसी है कि कोर्ट फ़रार पुलिसवालों की अग्रिम ज़मानत तक रद्द कर दे रहा है.
दूसरी तरफ़ जामताड़ा का मिनहाज अंसारी है. पुलिस उसे इस आरोप में उठाकर ले गई कि उसने वॉट्स एप पर एक मरी गाय की फोटो शेयर की थी. फिर पुलिस और जामताड़ा के एक बंदे में मिलकर थाने में मिनहाज की पिटाई की और वो मर गया. मिनहाज की मां को भी मारा और गाली दी गई.
मगर मरने के बावजूद मिनहाज को मीडिया की वो कवरेज नसीब नहीं है जो सुरेश यादव को अभी भी मिल रही है. जिसकी दो-दो मेडिकल रिपोर्ट कहती है कि उसके बदन पर कुछ मामूली खरोंच बस हैं.
मिनहाज अंसारी की हत्या के लिए पुलिसवालों को अंडरग्राउंड नहीं होना पड़ा है जैसा कि सुरेश के मामले में है.
मिनहाज या उससे मिलते-जुलते नाम वाले दर्जनभर से ज़्यादा हैं जिन्हें बीते दो-तीन साल में पुलिस उठा कर ले गई है. उन्हें लॉकअप में बंद करके पीटा गया है, गिरफ़्तारी हुई है. कोई मदद के लिए थाने जाए तो पुलिसवाले से गाली मिली है.
जिन ‘गलतियों’ पर इन्हें उठाया जाता है, अगर इन्हीं वजहों से संघ या उस मानसिकता से जुड़े लोगों को उठाया जाने लगे तो जेलें कम पड़ जाएंगी.
उन्हें तो सरेआम गाली, धमकी और गुंडागर्दी करने पर भी पुलिस कुछ नहीं कहती.
हमारे दफ़्तर में एक साथी आदित्य मेनन हैं. पिछले दिनों उन्होंने ब्लॉग लिखा कि मिनहाज जैसी मिसालोंं की कमी नहीं है. भारत हिंदू राष्ट्र है. इसे घोषित कर देना चाहिए.
मैंने उन्हें ब्लॉग के लिए मुबारकबाद दी. साथ ही यह भी कहा कि मैं इस बेबाक़ी से फ़िलहाल नहीं लिख सकता.
क्या पता पुलिस कब उठा ले जाए।

शाहनवाज़ मालिक
लेखक कैच हिंदी के एडिटर हैं

TOPPOPULARRECENT