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सूबे में अकलियत मुफाद की मंसूबाबंदी नहीं बन रहीं

अकलियतों के बहबूद के लिए बनी मल्टी-सेक्टोरल डेवलपमेंट (एमएसडी) स्कीम को लागू करने में रियासत हुकूमत नाकामियाब साबित हो रही है। मर्कज़ी हुकूमत की बार-बार ताकीद के बावजूद इस स्कीम के लिए अपनी वर्किंग रिपोर्ट नहीं भेज पा रही है। रिय

अकलियतों के बहबूद के लिए बनी मल्टी-सेक्टोरल डेवलपमेंट (एमएसडी) स्कीम को लागू करने में रियासत हुकूमत नाकामियाब साबित हो रही है। मर्कज़ी हुकूमत की बार-बार ताकीद के बावजूद इस स्कीम के लिए अपनी वर्किंग रिपोर्ट नहीं भेज पा रही है। रियसती हुकूमत की तरफ से यकीन दिया गया था कि मई में ये एक्शन प्लान भेज दिए जाएंगे। ऐसा नहीं होने पर मर्कजी अक़लियत बहबूद वज़ीर के.रहमान खान ने वजीरे आला नीतीश कुमार को खत लिखकर अपनी फिक्र ज़हीर की है।

खान ने कहा है कि बिहार में एमएसडी मंसूबाबंदी का 7 की जगह 20 अजला में तौसिह कर दिया गया है। इन 20 अजला के 75 ब्लॉक और 8 शहरों में इस मंसूबा को लागू किया जाना है। हरएक ब्लॉक या शहर के लिए 10 करोड़ रुपये की मंसूबा रियासत हुकूमत से मांगी गई थीं, लेकिन इन्हें भेजने में रियासत हुकूमत अबतक नाकामियाब रही है।

इस साल 8 अप्रैल को मुनक्कीद तजवीज बैठक में बिहार के आकलियाती बहबूद महकमा के चीफ़ सेक्रेटरी आमिर सुबहानी ने यकीन दिया था कि मई के आखिर तक में वर्किंग मंसूबा रिपोर्ट भेज दी जाएगी। वर्किंग रिपोर्ट के अबतक नहीं मिलने से रक़म भी नहीं मिल पा रही है। कुछ दिनों पहले लिखे अपने खत में खान ने वजीरे आला से इस मामले में मुदाख्लत करने की दरख्वास्त किया है।

ये काम होने हैं : इंदिरा आवास, आंगनबाड़ी सेंटर, सेहत सेंटर, आइटीआइ, पालिटेक्निक अदरे, स्कूलों में टॉइलेट, बोर्डिंग स्कूल, लयबरोटरी, अजाफ़ी क्लास-रूम, इंटर कालेज, लड़के और लड़कियों के लिए हॉस्टल वगैरह की कायम के अलावा पीने के पानी और सोलर लैंटर्न जैसी सहूलत मुहैया कराना।

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