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सेक्स वर्कर धंधा छोड़ें, तभी मिलेगी घर में रहने की इजाजत: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मीरगंज स्थित रेड लाइट एरिया में सेक्स वर्करों को वहां के घरों में रहने को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने साफ कहा कि यदि सेक्स वर्कर कोर्ट में इस आशय का हलफनामा देती हैं कि वे देह व्यापार का धंधा नहीं करेंगी. इसके बाद ही उन्हें उनके मकान में रहने की इजाजत मिलेगी.

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प्रदेश 18 के अनुसार, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनैतिक देह व्यापार कानून के तहत वहां की सेक्स वर्करों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए जिला मजिस्ट्रेट ने उनके मकान को सील करने का आदेश दिया था. डीएम के इस फैसले के खिलाफ सेक्स वर्करों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था. उन्हीं की याचिका पर हाईकोर्ट ने सुनवाई की.
अदालत ने कहा कि सेक्स वर्कर अपने हलफनामे में कहें कि वे अपने मकान में सपरिवार रहेंगी और किसी दूसरे व्यक्ति को उसमें नहीं बुलाएंगी. यही नहीं कोर्ट ने ये भी कहा कि वे अपने मकान का उपयोग निवास के अलावा किसी अन्य काम के लिए नहीं करेंगी.
यह आदेश मुख्य न्यायाधीश डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने सत्यभामा और दो अन्य की याचिकाओं पर दिया है. याची का कहना है कि उसके मकान संख्या 56सी/73सी का बैनामा लिया है. इसी मकान का भूतल अंजलि सामंत का है.
इसी साल अप्रैल महीने में पुलिस ने देह व्यापार की शिकायत पर नोटिस जारी कर पूरा मकान सील कर दिया था. एसडीएम के इस आदेश की वैधता को चुनौती दी गई थी.
याची के अधिवक्ता दयाशंकर मिश्र का कहना था कि जब तक दोष सिद्ध नहीं हो जाता, तब तक सरकार को भवन सील करने का अधिकार नहीं है

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