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सेना प्रमुख चयन को सरकार ने बताया सही, आतंकवाद से निपटने का तजुर्बा को अहमियत

नई दिल्ली। मोदी सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत को बतौर अगला सेना अध्यक्ष नियुक्ति करने के फ़ैसले का बचाव करते हुए कहा है कि ये निर्णय पूरी तरह से योग्यता के आधार पर किया गया है। सरकार ने ये भी कहा है कि नियुक्ति सुरक्षा हालातों और आवश्यकताओं के आधार पर की गई है। मालूम हो कि कांग्रेस और वाम दलों ने बिपिन रावत की नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि नियुक्ति में वरिष्ठता का ख्याल नहीं रखा गया।

रक्षा मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ की नियुक्ति सेना कमांडर रैंक के अधिकारियों के एक पैनल में से की गई है। सेना कमांडरों के रैंक के अधिकारियों के पैनल में सभी अधिकारी सक्षम हैं और सर्वाधिक योग्य का चयन किया गया है। मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान सुरक्षा स्थिति में, आतंकवाद का मुकाबला करने और आतंकवाद विरोधी मुद्दे प्रमुख हैं।

कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने ट्विटर पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आर्मी चीफ की नियुक्ति में वरिष्ठता का ख्याल क्यों नहीं रखा गया? क्यों लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी और लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद अली हरीज की जगह बिपिन रावत को प्राथमिकता दी गई। पूर्वी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह के बाद सबसे वरिष्ठ है। दक्षिणी सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरीज अगले सबसे वरिष्ठ हैं।

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