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सेहत मंद जिस्म के लिए सेहत मंद आँखें भी ज़रूरी

अलीगढ़, 07 दिसंबर: (एजेंसीज़) बीनाई हमारे लिए अल्लाह तआला की एक ऐसी नेअमत है जो अगर ना होती तो हमारा जीना मुहाल हो जाता। सारा जिस्म सेहत मंद हो, शख़्सियत ख़ूबरू हो, लेकिन अल्लाह तआला किसी को बीनाई से महरूम कर दे तो सेहतमंदी और ख़ूबसूरती कि

अलीगढ़, 07 दिसंबर: (एजेंसीज़) बीनाई हमारे लिए अल्लाह तआला की एक ऐसी नेअमत है जो अगर ना होती तो हमारा जीना मुहाल हो जाता। सारा जिस्म सेहत मंद हो, शख़्सियत ख़ूबरू हो, लेकिन अल्लाह तआला किसी को बीनाई से महरूम कर दे तो सेहतमंदी और ख़ूबसूरती किसी काम की नहीं रह जाती और इंसान यही दुआ करता रहता है कि या अल्लाह तो अपने फ़ज़ल-ओ-करम से बीनाई लौटा दे।

जिस अल्लाह ने आँखें दी हैं उनकी हिफ़ाज़त भी हम पर लाज़िम है। आँखों को भी जिस्म के दीगर आज़ा की तरह आराम की ज़रूरत होती है लिहाज़ा मुसलसल पढ़ाई करते रहना या कोई ऐसा बारीक काम करना जिससे आँखों पर ज़ाइद बोझ पड़ता हो, हमें इससे गुरेज़ करना चाहीए।

आँखों की सफ़ाई करना भी हमारी आदत में शामिल होना चाहीए। रोज़ाना अर्क़ गुलाब के दो चार क़तरे भी आँखों को मिलते रहें तो हमारी आँखें थकावट के असर से बेनयाज़ हो जाती हैं। अगर बीनाई कमज़ोर हो जाए तो कोशिश इस बात की करनी चाहीए कि हम डाक्टर से मश्वरा करते हुए अपने लिए मुनासिब और आरामदेह ऐनक बनवाएं।

आजकल कंटेक्ट लेंस का चलन आम है लेकिन इसके इंतिख़ाब ( चुनने) में भी एहतियात की ज़रूरत है। कंटेक्ट लेंस ऐसे होने चाहिऐं जो हमारी आँखों को नुक़्सान ना पहुंचाएं।

ज़रूरत इस बात की है कि आँखों को धूल और धूप दोनों से बचाएं। शदीद धूप में इस्तेमाल किए जाने वाले स्याह चश्मों का इंतिख़ाब भी एहतियात से होना चाहीए क्योंकि बाज़ार में सस्ते किस्म के शीशों वाली ऐनकें हमारी आँखों को नुक़्सान पहुंचा सकती हैं। आम तौर पर Ray Ban के चश्मों का इस्तेमाल किया जाता है जिनकी क्वालिटी उम्दा किस्म की होती है।

आँख में अगर कुछ कचरा वग़ैरा चला जाए तो आँखों को ज़ोर ज़ोर से मलना नहीं चाहीए बल्कि आँखों को हल्के अंदाज़ में धोने से कचरा या कोई तिनका फ़ौरन बाहर निकल आता है।

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