Sunday , January 21 2018

सैलाब : न खाने का ठिकाना, न रहने का

अब तो गंगा का किनारा काटने को दौड़ता है। लहरों को देख कर दिल भी कांप उठता है। कब कोई लहरों की ज़द में आ जाये, डूब जाये हमेशा डर लगता है। न खाने का ठिकाना न सोने का। दिन में खाते हैं तो रात भूखे पेट ही गुजर जाता है। जहां कल तक फसलों से हरा

अब तो गंगा का किनारा काटने को दौड़ता है। लहरों को देख कर दिल भी कांप उठता है। कब कोई लहरों की ज़द में आ जाये, डूब जाये हमेशा डर लगता है। न खाने का ठिकाना न सोने का। दिन में खाते हैं तो रात भूखे पेट ही गुजर जाता है। जहां कल तक फसलों से हरा भरा था वह आज चारों तरफ पानी ही पानी और दरमियान में हम गरीबों की जिंदगानी है। यह दर्द रुसतमपुर, राघोपुर में सैलाब में फंसे दो सौ से ज़्यादा घर के मुतासीरों का है। ख़वातीन की परेशानी उनकी बातों में साफ झलकती है। बुध को लॉ कॉलेज घाट से लेकर राघोपुर, रूस्तमपुर तक आफत इंतेजामिया वज़ीर रेणु कुशवाहा, प्रिन्सिपल सेक्रेटरी व्यास जी, एनडीआरएफ टीम के साथ गंगा के साहिली इलाक़े में रहने वाले लोगों से मिले। खास कर रुस्तमपुर, राघोपुर में जाकर लोगों की दर्द सुनी और उन्हें एमदादी सामान भी दिये।

जानवरों की चोरी

सैलाब मुतासीरों का कहना था हुजूर कहां जाएं? पानी से बच, जानवर लेकर खुसरूपुर गये। हम लोगों का जानवर चोर ले गया। घर छोड़ते हैं तो खानदान की फिक्र और बाहर रहते हैं तो चोरों का डर। आप ही बताये क्या करें? कोई हम गरीबों की फिक्र करने वाला नहीं है। हमारा खानदान भूखे पेट है।

एक चबूतरे पर 150 लोग

रुस्तमपुर में एक बड़ा सा चबुतरा है, जिस पर अभी पानी की पहुंच नहीं हुआ है। वहां दिन और रात में लोग बैठते हैं और सोते भी हैं। बारिश होती है तो पॉलिथिन से ढक कर बचने की कोशिश करते हैं, लेकिन बच नहीं पाते हैं। बच्चो को सीने से लगा कर उनकी मां बारिश की पानी से बचाती है। भले ही पूरा राघोपुर पानी में तैर रहा है। लोगों का घर उजड़ गया है। इसके बावजूद भी सैलाब मुतासीर खानदान अपना घर छोड़ने को तैयार नहीं है। न जईफ और न ही बड़े। वज़ीर ने लोगों से दरख्वास्त भी किया कि आप लोगों को ज़यदा परेशानी हो रही है, इससे अच्छा है कि कैंप में सब चल कर रहें। लोगों का डर है कि अगर हम यहां से चले जाते हैं तो जो चौकी, चूल्हा, कपड़ा बर्तन और कुछ सामान है उसकी चोरी न हो जाए।

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