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सोहराबुद्दीन केस मामले में दो और गवाह बयान से मुकरे, बचे 44

मुंबई : दो अन्य गवाह सोमवार को सोहराबुद्दीन शेख में फर्जी मुठभेड़ मामले में मुकर गए हैं इस मामले में इस तरह के गवाहों की संख्या 44 हो गई। गवाह, निकुंज दलवाडी और किरण पांचाल, जो विशेष न्यायाधीश एस जे शर्मा से सोमवार को सीबीआई द्वारा जांच की गई थी, उन्होंने उन बयानों का समर्थन नहीं किया जो उन्होंने पहले दर्ज किए थे। अब तक, 62 अभियोजन पक्ष के गवाह अपने बयान से मुकरे हैं जिसकी परीक्षण छह महीने पहले शुरू हुआ था।

26 नवंबर 2005 को सोहराबुद्दीन के एनकाउंटर के बाद गुजरात एटीएस ने वे कार्टेज जब्त किए थे, जो राजस्थान और गुजरात की पुलिस टीम ने मौके पर फायर किए थे। कार्टेज जब्ती के दौरान गुजरात के किरण और निकुंज को गवाह बनाया गया था। इन दोनों ने सोमवार को कोर्ट में बताया कि उनके सामने कार्टेज जब्त नहीं किए गए थे और न ही उन्हींने कार्टेज देखे थे। उन्हें एटीएस टीम ने बुलाया था और पहले से लिखे हुए कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए थे। चार्जशीट में मौके पर फायरिंग करने वाली टीम में गुजरात इंस्पेक्टर नारायण सिंह डाबी और राजस्थान के इंस्पेक्टर अब्दुल रहमान खान, एसआई श्याम सिंह और हिमांशु सिंह राजावत को बताया हुआ है। लेकिन दोनों गवाह निकुंज और किरण ने कहा कि वे इन चारों में से किसी को नहीं पहचानते हैं और न ही इनको पहले कभी देखा था। इस पर सीबीआई ने इन दोनों को होस्टाइल करार दिया।

सीआईडी और सीबीआई ने पेश की चार्जशीट में यह लिखा है कि गुजरात आईपीएस राजकुमार पंड्यन सोहराबुद्दीन के हैदराबाद होने की सूचना पर वहां गए थे। हैदराबाद में पूर्व परिचित आईपीएस ई. राधाकृष्णन से गाड़ी और ठहरने की व्यवस्था में सहयोग के लिए कहा था। आईपीएस राजकुमार पंड्यन जब हैदराबाद पहुंचे थे, तो वे अपनी टीम के नारायण सिंह डाबी और अजय परमार के साथ ई. राधाकृष्णन से मिलने उनके सीआरपीएफ परिसर स्थित सरकारी बंगले पर गए थे। इसकी पुष्टि के लिए सीआईडी गुजरात ने 2007 में ई.राधाकृष्णन के सरकारी बंगले के गेट पर रखे एंट्री रजिस्टर (जिसमें सभी आने वालों की एंट्री होती थी) को जब्त कर साक्ष्य में शामिल किया था और ई.राधाकृष्णन से पूछताछ की थी।

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