Thursday , December 14 2017

सौ-सौ के नोट नहीं थे तो हॉस्‍पिटल ने नहीं दिया शव, पत्नी ने गिरवी रखा मंगलसूत्र

मेरठ: नोटबंदी के वजह से देश के अगल-अलग हिस्सों से दिल दहला देने वाली खबरें आ रही हैं। ऐसा की एक मामला मेरठ से सामने आया है जहां एक महिला को हॉस्पिटल प्रबंधन ने उसके पति का शव सिर्फ इस लिए नहीं दिया क्योंकि महिला के पास 100-100 के नोट नहीं थे। हॉस्पिटल प्रबंधन ने पांच सौ रुपये का नोट लेने से इंकार कर दिया तो मजबूरन महिला ने को अपना मंगलसूत्र और अन्‍य जेवर गिरवी रखकर अपने पति का शव हासिल किया।

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हरिद्वार जिले के ज्वालापुर निवासी मनीराम को ब्रेन हेमरेज के चलते मिमहेंस हॉस्पिटल में तीन नवंबर को भर्ति कराया गया था। इलाज के दौरान 65 वर्षीय मनीराम की मौत शुक्रवार को हो गई। परिजनों ने जब मनीराम के इलाज का बिल बनवाया  हॉस्पिटल की तरफ से 22 हजार रुपये का बिल थमाया गया। उसके बाद जब मनीराम के बेटे उमेश और सुमित बिल जमा करने काउंटर पर गए तो उनके पास 500-500 के नोट थे। मगर हॉस्पिटल ने कहा कि बिल को सिर्फ सौ-सौ के नोट लिया जाएगा। उसके बाद मनीराम के शव को देने से रोक दिया गया।

मनीराम के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से मिन्नते की कि बिल को पांच सौ के नोटों जमा कर लिया जाए पर उनकी तरफ से ऐसा करने से साफ इंकार कर दिया गया। परिजनों ने कह कि वे बाहर के रहने वाले हैं, वो कहां से सौ के नोटों का इंतजाम कर पाएगें। उसके बाद परिजनों ने हॉस्पिटल को अपने जेवर गिरवी रखने को कहा, लेकिन उससे भी इंकार कर दिया गया।

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इसके बाद परिजनों ने कंट्रोल रूम को फोन कर पुलिस को मौके पर बुलाया पर समस्या का समाधान नहीं हो सका। सारे मसकत करने के बाद जब हॉस्पिटल वालों का दिल नहीं पसीजा तो मनीराम की पत्नी ने अपना मंगलसूत्र और सोने की अंगूठी इसी शहर के एक ज्वैलर्स के यहां गिरवी रखकर सौ-सौ के नोटों का इंतजाम किया। उसके बाद शव को दिया गया।

जब इस संबंध में मीडिया वालों की तरफ से हॉस्पिटल प्रबंधन से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई तो उनसे संपर्क नहीं हो सका। सीएमओ विरेंद्र पाल ने बताया कि  मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। मैंने सभी हॉस्पिटल को आदेश दिया है कि किसी भी मरीज और उनके तीमारदार को कोई परेशानी न हो।  लेकिन ये मामला निजी हॉस्पिटल का है, मैं अपने स्‍तर से कार्रवाई करूंगा।

 

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