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स्कियोरिटी एजेंसीयों की दहशतगर्दी के ख़िलाफ़ नुमाइंदगी

आल इंडिया मुस्लिम मजलिस मुशावरत और दूसरी मिली तंज़ीमों (स‍स्थाओं) ने दहश्तगर्दी के नाम पर मुसलसल बढ़ती हुई स्कियोरिटी एजेसीयों की यकतरफ़ा कार्यवाईयों के लिए सख़्ती से रद्द-ए-अमल ज़ाहिर करते हुए वज़ीर-ए-दाख़िला चिदम़्बरम और क़ौमी अक़

आल इंडिया मुस्लिम मजलिस मुशावरत और दूसरी मिली तंज़ीमों (स‍स्थाओं) ने दहश्तगर्दी के नाम पर मुसलसल बढ़ती हुई स्कियोरिटी एजेसीयों की यकतरफ़ा कार्यवाईयों के लिए सख़्ती से रद्द-ए-अमल ज़ाहिर करते हुए वज़ीर-ए-दाख़िला चिदम़्बरम और क़ौमी अक़ल्लीयती कमीशन के सदर वजाहत हबीब उल्लाह को मकतूब ( पत्र/खत) लिख कर मुतनब्बा किया है कि हालिया वाक़्यात की वजह से मुस्लिम कम्यूनिटी के अंदर शदीद रद्द-ए-अमल पैदा हो रहा है।

ख़त में खासतौर से दो वाक़्यात ( घटनाओं) का ज़िक्र किया गया है। पहला वाक़्या इंजीनीयर फ़सीह महमूद का है जिनको हिंदूस्तानी हुकूमत के कहने पर सऊदी अरब ने 13 मई को हिंदूस्तान भेज दिया लेकिन तब से इस के बारे में कोई पता नहीं है और हिंदूस्तानी इदारे उनके बारे में लाइलमी का इज़हार कर रहे हैं।

दूसरा वाक़्या दो कश्मीरी नौजवान तलबा ( Students/छात्रों) का है जो अलफ़लाह आज़मगढ़ में ज़ेर-ए-तालीम हैं और अपने बीमार चचाज़ाद भाई से मिलने ट्रेन के ज़रीया दिल्ली आ रहे थे। 25 मई को अलीगढ़ स्टेशन पर स्कियोरिटी एजेंसीयों ने ट्रेन पर छापामार कर इन दोनों को उठा लिया और तब से इन के बारे में कोई ख़बर नहीं है।

मिली तंज़ीमों ने अपने मैमोरंडम में कहा कि मुस्लिम कम्यूनिटी को बहुत दुख है कि ये मसला मुस्तक़िल चल रहा है और इसी के तहत सहाफ़ी काज़मी की भी गिरफ़्तारी हो चुकी है हालाँकि बादियुन्नज़र (उपरी दृष्टी से) उनके ख़िलाफ़ कोई सुबूत नहीं है। मैमोरंडम में मज़ीद कहा गया है कि स्कियोरिटी एजेंसीयां ज़रूरत से ज़्यादा चौकसी दिखाते हुए सिर्फ शुबा की बुनियाद पर मज़लूमीन (बेगुनाहो) को गिरफ़्तार कर रही हैं।

ये एजेंसीयां गिरफ़्तारी के बाद उन को गै़रक़ानूनी हिरासत में रख कर सुबूत जुटाने की कोशिश करती हैं या ताज़ीब के ज़रीया उन से एतराफ़ नामों पर दस्तख़त करवाती हैं जो बज़ात-ए-ख़ुद गै़रक़ानूनी है और बैन-उल-अक़वामी ( अंतर्राष्ट्रीय) मुआहिदों की ख़िलाफ़वर्ज़ी है जिन पर हिंदूस्तानी हुकूमत दस्तख़त कर चुकी है।

मेमोरंडम में मज़ीद कहा गया है कि ये ग़ैर मंतक़ी वाक़्यात यू पी ए के तईं मुस्लिम कम्यूनिटी की गर्मजोशी को मजरूह करते हैं। मेमोरंडम में मुंदरजा ज़ैल ज़िम्मा दारान ने दस्तख़त किए। डाक्टर ज़फ़र उल-इस्लाम ख़ान सदर आल इंडिया मुस्लिम मजलिस मुशावरत, जनाब फ़ारूक़ मुज्तबा सदर कोआर्डीनेशन फ़ार इंडियन मुस्लिम्स, जनाब मुहम्मद अहमद सेक्रेटरी जमात-ए-इस्लामी हिंद, मौलाना अबदुल हमीद नामानी सेक्रेटरी जमई तुल उलमा-ए-हिंद, डाक्टर तस्लीम रहमानी सदर मुस्लिम पोलीटिकल कौंसल आफ़ इंडिया, डाक्टर सय्यद क़ासिम इलयास रसूल सेक्रेटरी वेलफेयर पार्टी आफ़ इंडिया और दीगर ( दूसरे/ अन्य) शामिल हैं।

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