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स्टेट सेंट्रल लाइब्रेरी बदहाल

शहर हैदराबाद को इल्म का गहवारा कहा जाता है। इस शहर को अपने दामन में दुनिया की पहली उर्दू यूनीवर्सिटी (उस्मानिया यूनीवर्सिटी) हिंदुस्तान बल्कि एशीया के सब से बड़े म्यूज़ीयम (सालार जंग म्यूज़ीयम) हिंदुस्तान की सब से बड़े और चुनिंदा कुत

शहर हैदराबाद को इल्म का गहवारा कहा जाता है। इस शहर को अपने दामन में दुनिया की पहली उर्दू यूनीवर्सिटी (उस्मानिया यूनीवर्सिटी) हिंदुस्तान बल्कि एशीया के सब से बड़े म्यूज़ीयम (सालार जंग म्यूज़ीयम) हिंदुस्तान की सब से बड़े और चुनिंदा कुतुब ख़ानों में से एक (स्टेट सेंट्रल लाइब्रेरी) मुल्क के क़दीम तरीन मेडिकल कॉलेजों से एक (उस्मानिया मेडिकल कॉलेज), उस्मानिया हॉस्पिटल, निज़ामीया शिफ़ाख़ाना (यूनानी दवाख़ाना चारमीनार) के क़ियाम का एज़ाज़ हासिल है,

लेकिन अफ़सोस के साथ लिखना पड़ता हैकि क़ुतुब शाही और आसिफ़ जाहि दौर में तामीर कर्दा तारीख़ी इमारतों और क़ायम कर्दा इदारों की एक सोची समझी साज़िश के तहत हैयत ही बदली जा रही है।

उस की ताज़ा तरीन मिसाल 122 साला क़दीम स्टेट सेंट्रल लाइब्रेरी (कुतुब ख़ाना आसिफ़िया) है जो आहिस्ता आहिस्ता मिट्टी के ढेर में तबदील हो रही है। अगर्चे डायरेक्टर ऑफ़ पब्लिक लाइब्रेरीज़ ने इस आलीशान इमारत की अज़मते रफ़्ता की बहाली के लिए 2.33 करोड़ रुपये लॉगती काम शुरू करने का बीड़ा उठाया था और दिसंबर 2011 तक इस मक़सद के लिए उस ने इस में से 1.28 करोड़ रुपये आंध्र प्रदेश एजूकेशन वेलफ़ेयर इन्फ़रास्ट्रक्चर डेवलप्मेन्ट कारपोरेशन (APEWIDC) को जारी किए।

चुनांचे ए पी ई डब्लयू आई डी सी ने इस हेरिटेज इमारत की तज़ईने नव का काम एक गुत्तादार वे बाबू के तफ़वीज़ किया। मुआहिदा के मुताबिक़ 4 जुलाई 2011 से अंदरून 9 माह काम को मुकम्मल किया जाना ज़रूरी था लेकिन काम शुरू हुए ढाई साल का अर्सा गुज़र चुका है इस के बावजूद अब तक सिर्फ़ 40 फ़ीसद ही काम हुआ है और इस काम के बारे में यही कहा जा रहा है कि म्यारी नहीं हुआ है।

हम ने ख़ुद देखा कि 72,247 मुरब्बा गज़ अराज़ी पर तामीर कर्दा कुतुब ख़ाना आसफ़िया की हालत दिगरगों है। किताबों, जराइद और मख़तूतात का जायज़ा लेने के लिए कुतुबख़ाना आने ओले बाअज़ शहरीयों का कहना है कि अब तक तज़ईने नव का जो काम किया गया है वो किसी भी लिहाज़ से म्यारी नहीं क्योंकि जो गुत्तादार ये काम कर रहा है इस के पास तारीख़ी आसार की मुरम्मत और दरूस्तगी और तज़ईने नव के माहिर वर्कर ही नहीं हैं वैसे भी तारीख़ी इमारतों की अज़मते रफ़्ता की बहाली के लिए तर्बीयत याफ़्ता और माहिर कारीगरों से काम लिया जाता है।

बहरहाल रियास्ती हुकूमत और डाएरेक्टोरेट ऑफ़ पब्लिक लाइब्रेरीज़ को चाहीए कि वो तारीख़ी लाइब्रेरी की अज़मते रफ़्ता बहाल करने पर ख़ुसूसी तवज्जा मर्कूज़ करे क्योंकि 1998 में एन्टाक की जानिब से हेरिटेज इमारत क़रार दी गई ये लाइब्रेरी शहरियाने हैदराबाद का एक अनमोल असासा है और इस का तहफ़्फ़ुज़ हम सब की ज़िम्मेदारी है।

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