Tuesday , December 12 2017

स्वच्छ हवा का अधिकार एक मौलिक अधिकार, सरकार उचित क़ानून पास करे

दिल्ली:दीपावली के समय सर्वोच्च न्यायालय के दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के कारण पटाखों पर प्रतिबंध वालेआदेश पर देश भर में इसेधर्म से जोड़ते हुए बहुत बहस हुई। हिंदू संगठनों ने जोर शोर सेअभियान चलाया की पटाखे चलाओ और खूब चलाओ।

अफसोस है की हम प्रदूषण जैसी भयानक समस्या पर भी राजनीति करते हैं।  नतीजा हमारे सामने हैं।

विभिन्न अदालतों के निर्णय को प्रदूषण नियंत्रण के उपायोंको एक तरफ करके हम जब पानी सर से ऊपर हो गया तब मूल समस्या के समाधान की ओर ना जाकर फिर से कुछ करने का दिखावा कर रहे हैं। ऐसा भी नहीं कि सरकारों की नियत साफ ना हो।

किंतु केंद्र, दिल्लीव् पडोसी राज्यों की सरकारों में आपसी तालमेल ना होना व्दोषारोपण की राजनीति केकारण आज स्थिति इतनी खराब कर दी है कि दिल्ली के निवासियों के जीवन को दांव पर लगा दिया गया है।

दिल्लीवासियों में भी खासकर गरीबों का जीवन, सड़क पर रहने वाले मजदूर, रिक्शा वाले, कूड़ा बीनने वाले ऐसे तमाम वर्गों के लोग जिनके पास एक बंद घर भी नहीं है, के जीवन को हमने दाव पर लगा दिया है।

प्रदूषण को रोकने के लिए कारो के लिए ऑडईवन जैसे उपायों की बात होती है जो कि ऊंट के मुंह में जीरे जैसी बात है।

पिछले कुछ सालों से पड़ोसी राज्यों के किसानों पर पराली जलाने से प्रदूषण फैलाने का इल्जाम लगायाजा रहा है किंतु पूसा संस्थान, पंतनगर या ऐसे अनेक कृषि विश्वविद्यालयों संस्थानों में कोई भी ऐसा अध्ययन शायद नहीं किया और यदि किया भी है तो वह सामने नहीं आ पाया जो यह बताता की पराली को बिनाजलाए कैसे उपयोग में लाया जाए ।

महंगी खेती, सस्ती कृषि उपज, पानी, खाद जैसी तमाम समस्याओं से जूझते किसानों पर अब मुकदमे लगाए जा रहे हैं ।

किसानक्या करे जब खेती में पशुओ की जरूरत ही ख़त्महोती जा रही है । कुलमिलाकर गरीबो और किसानो पर हीमार ।उद्योग बंद किये जाते है तो भी गरीब मजदूरों पर ही असर आयगा ।

पराली तो बहुत समय से जलाई जाती है उसके भी अनेक कारण हैं खेत खाली करना है किंतु दिल्ली में जो तीव्र घनीभूत आबादी का रहना, उद्योगों का बढ़ना, तेजी से बढ़ता सड़क निर्माण कार्य व अनियंत्रित मकानआदि का निर्माण कार्य, सार्वजनिक वाहनों की कमी व् अनियंत्रित होती जा रही वाहनों की आबादी, वनभूमि व अन्य भूमि पर समुचित वृक्षारोपण का अभाव जैसे कारणों को क्यों नहीं देखा गया है?

अफसोस की बात है फिर भी सरकार जो नियम नीतियां बना रही है उससे गरीबों पर, गरीबों की जिंदगी पर कोई अच्छा प्रभाव नहीं पड़ने वाल।उनके जीवन रक्षण की कोई बात, कोई नीति नहीं ।

शायद इसलिए कीनीति बनाने वाले उनकी समस्याओं तक पहुंच नहीं पाते, नतीजा होता है की प्रदूषण से बचाव की बात सिर्फ मध्यम और उच्च वर्ग तक सीमित मानी जा रही है ।

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