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स्वामी के राजन विरोधी होने के पीछे RSS सोच

नई दिल्ली रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर रघुराम राजन की ओर से अचानक दूसरा कार्यकाल न लिए जाने का ऐलान किए जाने के बाद उनके पुराने विरोधी रहे सुब्रमण्यन स्वामी एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गए हैं। बीजेपी नेता सुब्रमण्यन स्वामी को अप्रैल में ही पार्टी ने राज्यसभा में भेजा था।

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़े अर्थशास्त्री सुब्रमण्यन स्वामी का राजन की आलोचना करने का ट्रैक रिकॉर्ड रहा है। जिन्होंने शनिवार को आरबीआई के गवर्नर पद का कार्यकाल दोबारा न लेने का ऐलान किया है। उनका तीन साल का कार्यकाल 4 सितंबर को समाप्त हो रहा है। उनकी ओर से अचानक लिए गए फैसले ने सरकारी अधिकारियों और विदेशी निवेशकों को हैरत में डाल दिया है।

2014 में पीएम नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने से पहले भी सुब्रमण्यन स्वामी राजन को हटाने की मांग कर चुके हैं। सुब्रमण्यन स्वामी ने राज्यसभा में पहुंचने के बाद उनके खिलाफ अभियान तेज कर दिया और आरएसएस के स्वर में बोलना शुरू किया। पीएम मोदी ने रघुराम राजन का समर्थन करते हुए उन्हें इकनॉमिक मुद्दों का बेहतरीन टीचर करार दिया था। उन्होंने फाइनैंस मिनिस्ट्री के अधिकारियों की मीटिंग बुलाकर सार्वजिनक तौर पर आरबीआई पर सवाल न खड़े करने की बात कही।

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