Monday , December 18 2017

सज़ा मुकम्मल कर चुके पाकिस्तानी क़ैदीयों को वतन रवाना किया जाए :सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने आज हिंद-ओ-पाक के माबैन एक इंतिहाई संगीन मुआमला को उठाते हुए ये इस्तिफ्सार किया कि दिमाग़ी तौर पर कमज़ोर ऐसे पाकिस्तानी क़ैदी जिन्होंने अपनी क़ैदी की मीयाद मुकम्मल कर ली है , उन्हें पाकिस्तान वापस क्यों नहीं भेजा जात

सुप्रीम कोर्ट ने आज हिंद-ओ-पाक के माबैन एक इंतिहाई संगीन मुआमला को उठाते हुए ये इस्तिफ्सार किया कि दिमाग़ी तौर पर कमज़ोर ऐसे पाकिस्तानी क़ैदी जिन्होंने अपनी क़ैदी की मीयाद मुकम्मल कर ली है , उन्हें पाकिस्तान वापस क्यों नहीं भेजा जाता ? इस मुआमला को दोनों ममालिक के दरमयान एक आला सतही इजलास में उठाए जाने की ज़रूरत है ।

बंच ने सदर-ए-पाकिस्तान आसिफ़ अली ज़रदारी के हालिया मुख़्तसर दौरा हिंद के मौक़ा पर इस मुआमला को उठाते हुए कहा कि क्या ज़रूरत इस बात की नहीं है कि एक संगीन और हस्सास मुआमला की इस वक़्त उठाया जाए जब दोनों ही ममालिक के सरबराहान की मुलाक़ात हो रही है ।

जस्टिस आर एम लोधा की क़ियादत वाली बंच से ये इस्तिफ्सार भी किया कि ऐसे क़ैदीयों को आख़िर पाकिस्तान रवाना ही नहीं किया जाता ? उन्हें हनूज़ जेल में रखना हमारे लिए तकलीफ़देह है । हमें दुख होता है कि सज़ाओं की तकमील के बाद भी क़ैदीयों को जेल में रखा जा रहा है । याद रहे कि बंच ने 21 पाकिस्तानी क़ैदीयों के हवाले से ये बात कही जिन में से 16 क़ैदी दिमाग़ी तौर पर माज़ूर हैं और पाँच गूंगे-ओ-बहरे हैं ।

ये तमाम वो बदक़िस्मत क़ैदी हैं जो अपनी सज़ाओं की तकमील के बाद भी जेलों में सड़ रहे हैं । एतवार के रोज़ हिंदूस्तान के एक रोज़ा मुख़्तसर से दौरे पर आए हुए सदर-ए-पाकिस्तान आसिफ़ अली ज़रदारी के लिए तर्तीब दीए गए ज़ुहराना में पाकिस्तान के अलील माईक्रो ब्यालोजिस्ट ख़लील चिशती का ज़िक्र भी किया गया जो राजस्थान की जेल में क़ैद हैं ।

ज़राए ने बताया कि वज़ीर-ए-दाख़िला पी चिदम़्बरम ने मिस्टर ख़लील चिशती के मुआमला में जो ब्यान दिया है इसके मुताबिक़ वो मुआमला अदालत में ज़ेर ए तस्फ़ीया है और अब तक अदालत ने इस मुआमला पर ग़ौर-ओ-ख़ौज़ नहीं किया है । सुप्रीम कोर्ट ने मर्कज़ को हिदायत की है कि वो अंदरून तीन हफ़्ता ये फ़ैसला करे कि सज़ाओं की तकमील के बाद क़ैदीयों को पाकिस्तान रवाना किया जाय या नहीं और समाअत की आइन्दा तारीख़ 2 मई मुक़र्रर की ।

TOPPOPULARRECENT