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हज़रत इमाम हुसैन (र) सारी इंसानियत के इमाम

हैदराबाद। 1 दिसम्बर (सियासत न्यूज़) हज़रत सय्यदना हुसैन (र) किसी एक ख़ास मज़हब के इमाम नहीं थे बल्कि सारी इंसानियत के इमाम थे। हज़रत हुसैन (र) का पैग़ाम भी सारी इंसानियत के लिए था और आप ने कर्बला में अपनी जान का नज़राना पेश करते हुए स

हैदराबाद। 1 दिसम्बर (सियासत न्यूज़) हज़रत सय्यदना हुसैन (र) किसी एक ख़ास मज़हब के इमाम नहीं थे बल्कि सारी इंसानियत के इमाम थे। हज़रत हुसैन (र) का पैग़ाम भी सारी इंसानियत के लिए था और आप ने कर्बला में अपनी जान का नज़राना पेश करते हुए सारी इंसानियत को बचा लिया। इन ख़्यालात का इज़हार मुख़्तलिफ़ मुफ़क्किरीन ने आज यहां गोल्डन जुबली हाल इदारा सियासत में शहादत सय्यदना हुसैन (र) पर एक सेमिनार से ख़िताब करते हुए किया जिस का एहतिमाम हैदरी एजूकेशनल एंड सोश्यल वेलफ़ेर सोसाइटी ने किया।

एडीटर सियासत जनाब ज़ाहिद अली ख़ान ने इस मौक़ा पर ख़िताब करते हुए कहा कि इदारा सियासत मज़हबी रवादारी को फ़रोग़ देने बैयन फ़िर्क़ा जाती तहरीकों को आगे बढ़ाने का सिलसिला जारी रखे हुए है। उन्हों ने कहा कि उन्हें उस की तहरीक ख़ादमेन हरमैन शरीफ़ैन मलक अबदुल्लाह से मिली जिन्हों ने इस्लाम के तमाम फ़िरक़ों मेंमुज़ाकरात के ज़रीया इत्तिहाद-ओ-इत्तिफ़ाक़ पैदा करने और फिर मुख़्तलिफ़ मज़ाहिब के पेशवाओं का एक इजलास तलब करते हुए आलमी सतह पर हम आहंगी पैदा करने की कोशिश की थी।

जनाब ज़ाहिद अली ख़ान ने कहा कि अगर आलमी सतह पर सर्वे करवाया जाय तो हज़रत सय्यदना हुसैन (र) से टूट कर मुहब्बत करने वाले सब से ज़्यादा हैदराबाद में पाए जाएंगे। उन्हों ने ये भी कहा कि हिंदुस्तानी अफ़्वाज में सिख रजमैंट की तरह एक मुस्लिम रजमैंट भी बनाई जाय तो मुल़्क की सालमीयत को दवाम हासिल होगा चूँकि मुस्लमान बड़े जयाले होते हैं और वो अपने वतन पर जानों को निछावर करते हुए मुल़्क की सरहदों की हिफ़ाज़त करते रहेंगे। उन्हों ने मुस्लमानों के मुख़्तलिफ़ फ़िरक़ों में आपसीइत्तिहाद पर भी ज़ोर दिया।

अल्लामा एजाज़ फ़र्ख़ु ने कहा कि हज़रत सय्यदना हुसैन इबनअलि की ज़िंदगी आनी फ़ानी जानी मकानी-ओ-पहचानी शख्सियत का नाम नहीं है और ना आप किसी मख़सूस फ़िरक़े क़बीले ख़ित्ते मुलक मुक़ाम-ओ-वक़्त की शख्सियत नहीं है और ना ही किसी मख़सूस मज़हब के इमाम हैं बल्कि आप आलिम इंसानियत के इमाम हैं आप के मुक़ाम-ओ-मर्तबा को तलाश करने शऊर इंसानी की तहोओं में झांक कर देखें तो पता चलेगा कि किस ने कब और किस तरह से ख़राज पेश किया है।

उन्हों ने कहा कि प्यास का मुदावा पानी है। किसी को प्यास लगती है तो वो पानी तो पी लेता है मगर उस की प्यास फिर कुछ देर बाद ऊद कर आती है। प्यास को दवाम-ओ-बक़ा है और पानी फ़नाहोजाता है। इसी तरह अज़मत हुसैन (र) समझने के लिए एक ज़िंदगी काफ़ी नहीं है। मौलाना सय्यद महबूब मह्दी आब्दी जाफरी इमाम जुमा हुसैनी सैंटर शिकागो ने कहा कि इस्लाम असल में इंसानियत का मुतरादिफ़ है।

रबूबियत की कोई हदें नहीं हैं इसी तरह रिसालत की हदें भी मालूम नहीं। उन्हों ने कहा कि हज़रत सय्यदना हुसैन (र) का पैग़ाम सारी इंसानियतके लिए था। आप ने असल में शहादत के ज़रीया सारी इंसानियत को बचा लिया है। डाक्टर सादिक़ नक़वी ने कहा कि कर्बला में जो जंग हुई वो शरीयत-ओ-हुकूमत के दरमियान की जंग थी जिस में शरीयत को कामयाबी मिली और हुकूमत को शिकस्त से दो-चार होना पड़ा। ।

यज़ीद हुकूमत पर फ़ाइज़ होजाने के बाद शरई अहकाम की पामालीकररहा था। उन्हों ने कहा कि यज़ीद इक़तिदार पालेने के बाद भी हज़रत हुसैन (र) से बैअतके लिए शिद्दत से तलबगार था और अगर हज़रत सय्यदना हुसैन (र) मंज़ूरी दे दीए होते तो शरीयत पर हुकूमत फ़ौक़ियत पा गई होती थी और फिर इस के बाद हम तक जो इस्लाम पहुंचा होता वो किस शक्ल में होता मालूम नहीं इस लिए कि हर बादशाह अपनी मर्ज़ी के मुताबिक़ शरीयत में तबदीली करता जाता।

हज़रत सय्यदना हुसैन (र) ने कर्बला में ये ऐलान कर दिया था कि क़तल हम होंगे और शिकस्त तुम्हारी होगी। आप मज़लूम थे मजबूर नहीं। आप ने सब्र से ज़ुलम को शिकस्त दी और सब्र साहिब इख़तियार की सिफ़त होती है मजबूर की नहीं। कमिशनर सिविल स्पलाईज़ मिस्टर हरप्रीत सिंह और मौलाना तनवीरअलुद्दीन ख़ुदा नुमाई ने भी ख़िताब करते हुए हज़रत सय्यदना हुसैन (र) और आप के जान निसारों की कुर्बानियों को ख़राज पेश किया। मिस्टर एमएफ ए बाक़िरी इस प्रोग्राम के कन्वीनर थे।

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