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हज़रत मुफ़्ती शाह मुहम्मद अबदुल्लाह साहिब फोलपोरी का उल्मा-ओ-अइम्मा से ख़िताब

हैदराबाद १९ मार्च (रास्त) उल्मा किराम अल्लाह ताला की फ़ौज हैं और ज़ाबता ये है कि चालीस फ़ीसद बजट फ़ौज के लिए हर हाल में मंज़ूर किया जाता है इस लिए उल्मा किराम को महंगाई की फ़िक्र करने की ज़रूरत नहीं। सरकारी खज़ाने से आप का बजट मंज़ू

हैदराबाद १९ मार्च (रास्त) उल्मा किराम अल्लाह ताला की फ़ौज हैं और ज़ाबता ये है कि चालीस फ़ीसद बजट फ़ौज के लिए हर हाल में मंज़ूर किया जाता है इस लिए उल्मा किराम को महंगाई की फ़िक्र करने की ज़रूरत नहीं। सरकारी खज़ाने से आप का बजट मंज़ूर होता ही। इन ख़्यालात का इज़हार हज़रत मुफ़्ती शाह मुहम्मद अबदुल्लाह फोलपोरी नबीरा शेख़ अलमशाइख़ शाह अबदुलग़नी फोलपोरी-ओ-ख़लीफ़ा अजल हज़रत शाह अबरारालहक़ऒ ने लजनৃ अलालमा-ए-के ज़ेर-ए-एहतिमाम मुदर्रिसा मिसबाह उल-उलूम जामि मस्जिद ए बयाटरी लाईन में उल्मा-ओ-अइम्मा से ख़िताब के दौरान किया।

उन्हों ने कहाकि अल्लाह ताला ने आप को अमानत अदा करने और इस को पहुंचाने का हुक्म दिया ही। उल्मा को बस काम करना है नतीजा की फ़िक्र में पड़ने की ज़रूरत नहीं नतीजा और अंजाम अल्लाह ताला के सपुर्द करना चाआई। अद्दवालामानৃ की तफ़सीर में हज़रत इबन अबासओ ने फ़रमाया कि तमाम मामू रात-ओ-मुनहियात को बजालाई, हिदायत तो बस अल्लाह के हाथ में ही, हज़रत नबी करीम ई के चचा ख़्वाजा अबू तालिब और इबराहीम अलैहि अस्सलाम के वालिद आज़र हिदायत ना पा सकी। आप सिल्ली अल्लाह अलैहि-ओ-सल्लम ने अपने चचा से फ़रमाया कि कलिमा कान में पढ़ दो ताकि अपनी वकालत महर आप की फाईल पर लगा दूं, ये तक ना होसका, काम की ज़िम्मेदारी उल्मा पर है काम करते चले जाओ जहां तक रिज़्क-ओ-रोज़ी का मसला है इस की तकमील सरकारी खज़ाने से होगी। अल्लाह ताला ने उल्मा के बारे में दस मर्तबा ताकीद से फ़रमाया कि इन को भूका नहीं रखूंगा। अलमताम हो अल्लाह , खिलाने वाला तो बस अल्लाह ही है।

आज पूरी दुनिया पेट प्लेट और फ़्लैट की चक्क्र में इस के पीछे दौड़ रही है इस के इलावा कुछ नहीं। अगर उल्मा भी इस के पीछे रहें तो बड़ी महरूमी की बात ही। उल्मा को तो अल्लाह ताला ने उलूम शरीयत से नवाज़ा है जो सब से बड़ी डिग्री है ये आख़िरत की तरफ़ ले जाती ही। बाक़ी सब डिग्रियां पेट के पीछे लगी हुई हैं। इस के इलावा कुछ नहीं। हज़रत-ए-वाला ने मज़ीद कहाकि अपनी अमानतों को ज़िम्मेदारी के साथ पूरा करना ही उल्मा की ज़िम्मेदारी ही। रक्त अंगेज़ दुआ पर जलसा काइख़तताम अमल में आया।

इस मौकै पर मौलाना अबदालसबोर मज़ाहरी, मौलाना ज़हूर उल-हक़ मज़ाहरी सदर लजनৃ अलालमा-ए-, मौलाना अबदालमलक मज़ाहरी, नायब मोतमिद मौलाना अबैदुल्लाह मिफताही, मौलाना सय्यद शहीर हसामी, मौलाना अबदालोहाबज़ाहिद अलक़ा सिमी, मौलाना मूसा ख़ान नदवी, मौलाना इतरत अहमद हसामी के इलावाहुफ़्फ़ाज़-ओ-उल्मा-ओ-मदावीन ख़ुसूसी की कसीर तादाद मौजूद थी।

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