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हज़ारों बरहम इर्दनी (Jordanians) शहरीयों का एहितजाजी मुज़ाहरा, शाह से सुबकदोशी का मुतालिबा

अम्मान, १७ नवंबर (ए एफ़ पी) अरदन (Jordan) की तारीख़ में एक अदीमुल मिसाल एहितजाजी मुज़ाहरा करते हुए हज़ारों इर्दनी शहरीयों ने शाह अरदन अब्दुल्लाह दोम से सबकदोश होने का मुतालिबा किया, जब कि पुलिस ने उन्हें क़सर शाही की सिम्त पेशरफ़्त से रोक द

अम्मान, १७ नवंबर (ए एफ़ पी) अरदन (Jordan) की तारीख़ में एक अदीमुल मिसाल एहितजाजी मुज़ाहरा करते हुए हज़ारों इर्दनी शहरीयों ने शाह अरदन अब्दुल्लाह दोम से सबकदोश होने का मुतालिबा किया, जब कि पुलिस ने उन्हें क़सर शाही की सिम्त पेशरफ़्त से रोक दिया था, क्योंकि वो ईंधन की क़ीमतों में ज़बरदस्त इज़ाफ़ा के ख़िलाफ़ अपनी ब्रहमी ज़ाहिर करना चाहते थे।

एहितजाजी जुलूस में दस हज़ार से ज़्यादा अफ़राद बिशमोल इस्लाम पसंद और बाएं बाज़ू के हामी शरीक थे। वो हुकूमत में इस्लाहात, आज़ादी और अब्दुल्लाह मुर्दाबाद, अल्लाह नाइंसाफ़ी से अज़ीम तर है, अब्दुल्लाह तुम्हारा दौर ख़त्म हो गया के नारे बुलंद कर रहे थे।

अवाम हुकूमत को इक़तिदार ( शासन/ सत्ता) से बेदख़ल करना, शाह अब्दुल्लाह की सुबकदोशी और जिलावतनी के ख़ाहिशमंद हैं। अम्मान के मुज़ाफ़ात में हुसैनी मस्जिद के रूबरू ब्रहम (नाराज़) अवाम नारे लगा रहे थे कि हुकूमत अपना जवाज़ खो चुकी है।

ये पहली बार है, जब कि शाह अब्दुल्लाह की बरसर-ए-आम तौहीन करते हुए उन की हुकूमत को गै़रक़ानूनी क़रार दिया गया है और इक़्तिदार ( शासन) से सबकदोश ना होने पर जेल पहुंचा देने का ऐलान किया गया है।

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