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हज़ हाउस की मरम्मत का कम लटका

रांची 24 अप्रैल : इस साल सितम्बर में शुरू होने वाली हज़ के सफ़र के दौरान मुसाफिरों को गुज़िस्ता साल की तरह फिर परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। कडरु वाक़ेय हज़ हाउस में महफूज़ और बेहतर सहूलियात नहीं मिल पायेगी। क्योंकि झारखण्ड रि

रांची 24 अप्रैल : इस साल सितम्बर में शुरू होने वाली हज़ के सफ़र के दौरान मुसाफिरों को गुज़िस्ता साल की तरह फिर परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। कडरु वाक़ेय हज़ हाउस में महफूज़ और बेहतर सहूलियात नहीं मिल पायेगी। क्योंकि झारखण्ड रियासत आवास बोर्ड को हज़ हाउस मरम्मत का कम के कोई ठेकेदार नहीं मिल रहा है।

गुज़िस्ता 26 मार्च को बोर्ड ने मरम्मत को लेकर टेंडर निकल था। आधा दर्जन ठेकेदारों ने काम से मुताल्लिक पेपर दिया था। 22 अप्रैल को जब टेंडर खुला, तो उसमे किसी ठेकेदार ने पेपर जमा नहीं किया। टेंडर में ठेकेदार शामिल नहीं हुए। इसलिए बोर्ड ने टेंडर मंसूख कर दिया। अब तक हज़ हाउस के तामीरी काम पर 4.86 करोड़ खर्च हो चुके हैं। आवास बोर्ड को हज़ हाउस मरम्मत सहित दीगर काम करवाने हैं।

बहबूद महकमा ने इसके लिए 1.60 करोड़ रुपये दिए है।वहीं, बोर्ड के इंजीनयरों ने करीब 3.42 करोड़ रुपये का एस्टिमेट बनाया है। सभी कम 18 माह के अंदर पूरा करना है। पैसा रहते हुए भी बोर्ड हज़ हाउस में काम नहीं करा पा रहा है। बोर्ड के कार्यपालक इंजीनयर नवल किशोर सिंह का कहना है की टेंडर मंसूख कर दिया गया है। जल्द ही फिर टेंडर निकलेगा।
चीफ इंजीनयर को इस मुताल्लिक में फैसला लेना है।

सदर ने दिलवाया था बेटे को काम
रियासती हज़ कमेटी के सदर हाजी हुसैन अंसारी ने अपने बेटे शब्बीर अली को हज़ हाउस तामीर काम की मोनिटरिंग की जवाबदेही दिलवाई थी। उस वक़्त शब्बीर अली हाउसिंग बोर्ड में कॉन्ट्रैक्ट पर सहायक इंजीनयर थे। जब हज़ हाउस का छज्जा गिरा, तो शब्बीर ही इसकी मोनिटरिंग कर रहे थे।

तफ्शीश के दौरान हज़ हाउस में मिली खामियां
निगरानी कमिश्नर को सौपी रिपोर्ट में तकनिकी जाँच कमिटी ने लिखा है की इसकी डिजायनिंग गलत है। डिजायनिंग और ड्राइंग में तकनिकी खामी है। इसमें पोर्टिको जोड़ने का तरीका ठीक नहीं था। इसकी इंतेजामिया और तकनिकी मंजूरी भी गलत है। इमारत की छत के आधे हिस्से में सीपेज है। तकनिकी तौर से छत की तामीर गलत है।

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