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हज्ज में जाने वालों पर 35हज़ार रुपया का जयादा बोझ

* सऊदी रीयाल की क़ीमत 15.23 रुपया तय‌, हिंदूस्तानी करंसी की क़दर में गिरावट का असर

* सऊदी रीयाल की क़ीमत 15.23 रुपया तय‌, हिंदूस्तानी करंसी की क़दर में गिरावट का असर
हैदराबाद।[संवाददाता: मुहम्मद मुबश्शिर उद्दीन ख़ुर्रम] हिंदूस्तान से हज्ज में जाने वालों को हज कमेटी की मदद‌ से अल्लाह के घर कि हज‌ की अदायगी के लिए पिछ्ले साल‌ से लगभग‌ 35हज़ार रुपयें जयादा अदा करने होंगे। इंटरनेशनल मार्केट‌ में रुपया की क़दर में कमी के सबब पैदा हुए हालात‌ के नतीजे‍ में हज्ज में जाने वालों पर जयादा माली बोझ डाला जायेगा।

मर्कज़ी(केन्द्रीय) हज कमेटी ने हज 2012 के लिए रीयाल की क़ीमत 15.23 रुपया तय‌ की है और ग्रीन ज़ुमरे में चुने जाने वाले हाजियों के लिए 9 हज़ार रीयाल मुअल्लिम कि फ़ीस, रिहायश, मक्का और मदीना के दरमयान आने, जाने और हाजियों को अदा किए जाने वाले 2100 रीयाल शामिल हैं। 9 हज़ार रीयाल के एतबार से ग्रीन ज़ुमरे के हाजियों को 137070 रुपये अदा करने होंगे जबकि हवाई सफ़र टिकेट हैदराबाद। मदीना। जिद्दा। हैदराबाद के लिए 17000 रुपयों के इलावा लगभग‌ एक हज़ार रुपया एय‌रपोर्ट यूज़र डेव्लपमेंट फ़ीस अदा करनी होगी। इस तरह ग्रीन ज़ुमरे के हाजियों का कुल खर्च‌ एक लाख 55 हज़ार 70 रुपये होनेकि सम्भावना है।

मर्कज़ी(केन्द्रीय) हज कमेटी ज़राए(सुत्रो) के मुताबिक‌ हज कमेटी के इस फ़ैसले से हज्ज में जाने वालों पर जयादा बोझ पडेगा लेकिन ये बोझ दुनीया भर मे करंसी बदलने की क़ीमत में पैदा हुई गिरावट‌ के सबब पड रहा है। मर्कज़ी हज कमेटी ने हज 2012 में सिर्फ दो ज़ुमरे रखे हैं, अज़ीजिया ज़मुरा के हाजियों के लिए हज बैतुल्लाह के कुल खर्च लगभग‌ एक लाख 35हज़ार तक पहुंचने कि सम्भावना है जिस में हैदराबाद।मदीना, जिद्दा। हैदराबाद हवाई सफ़र के इलावा दुसरे खर्चें भि शामिल हैं।

हज 2011 में मर्कज़ी हज कमेटी ने तीन ज़ुमरे रखे थे और उन तीन ज़मरों मैं अलग‌ अलग खर्च तय‌ किए गए थे। ग्रीन ज़मुरा के लिए हज 2011 में एक लाख 18 हज़ार रुपये अदा करने थे जबकि वाईट ज़मुरा में जिसे दूसरा दर्जा दिया गया था के लिए लगभग‌ एक लाख 10 हज़ार रुपये वसूल किए जा रहे थे लेकिन अब ये दर्जा बाक़ी नहीं है। अज़ीजिया के साल 2011 में कुल खर्च‌ एक लाख 7 हज़ार रुपये वसूल किए गए थे मगर इस मर्तबा अज़ीजिया के कुल खर्चें एक लाख 35 हज़ार तक पहुंच चुके हैं।

मर्कज़ी हज कमेटी के इस फ़ैसले के असरात हिंदूस्तान से हज में जाने वालो पर पडेंगे जिस से हिंदूस्तान की बहुत सारी रियास्तों से रवाना होने वाले हाजी अपना सफ़र हज रद‌ कर सकते हैं।

मर्कज़ी हज कमेटी ज़राए(सुत्रो) के मुताबिक रीयाल की क़ीमत में बढावा और रुपया की क़दर में गिरावट के सबब पैदा हुई इस हालत‌ से निमटने के लिए हज कमेटी के पास सिवाए खर्चों में बढावे के इलावा दूसरा कोई चारा नहीं है। बताया जाता है कि मक्का मुकर्रमा में ग्रीन ज़ुमरे की रिहायश के लिए हज कमेटी तीन से चार हज़ार रीयाल अदा करने पर मजबूर है।

हरमैन शरीफ़ैन में किरायों में बढावा और रुपया की क़दर में गिरावट के सबब जो हालत पैदा हुई है इस के सिधे असरात हज में, जाने वालों पर पड रहे हैं। महकमा शहरी हवाबाज़ी ने इस साल पेट्रोल की क़ीमतों में बढावे के सबब हवाई किरायों में एक हज़ार रुपया का बढावा करने का भी फ़ैसला किया है।

पिछ्ले साल हज में जाने वालों के लिए रियायती हवाई किराया 16000 रुपया तय‌ किया गया था लेकिन हज 2012 के लिए इस में एक हज़ार रुपया का बढावा करते हुए उसे 17000 कर दिया गया है। बताया जाता है कि मर्कज़ी हज कमेटी ने पिछ्ले साल की तरह रियास्तों की तक़सीम के ज़रीये यू डी एफ़ चार्जस तय करने का सिलसिला ख़तम‌ करने का फ़ैसला किया है और मुल्क भर के तमाम हाजियों के लिए एय‌रपोर्ट यूज़र डेवलपमेंट फ़ीस बराबर तय‌ करने के मुताल्लिक़ मंसूबा बंदी कर रही है।

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