Tuesday , June 19 2018

हज वफ़द के इंतिख़ाब की बुनियाद का वेब साईट्स पर ऐलान

मर्कज़ी इत्तलाआती कमीशन ने वज़ीर-ए-आज़म के दफ़्तर को हिदायत दी कि अपनी वेब साईट्स पर ख़ैर सगाली हज वफ़द के और इस के अरकान के नामों का इंतिख़ाब करने के तरीका कार को वेब साईट्स पर शाय किया जाय।

मर्कज़ी इत्तलाआती कमीशन ने वज़ीर-ए-आज़म के दफ़्तर को हिदायत दी कि अपनी वेब साईट्स पर ख़ैर सगाली हज वफ़द के और इस के अरकान के नामों का इंतिख़ाब करने के तरीका कार को वेब साईट्स पर शाय किया जाय।

इंटरनेशनल कमिशनर शेलश गांधी ने हक़ इत्तिलाआत क़ानून के तहत हासिल इख़्तयारात इस्तिमाल करते हुए वज़ीर-ए-आज़म के दफ़्तर को हिदायत दी कि शफ़्फ़ाफ़ियत के क़ानून की दफ़ा के तहत हुकूमत पर लज़ूम आइद होता है कि वो इत्तिलाआत वेब साईट्स पर शाय करे।

ये मुक़द्दमा हक़ इत्तिलाआत क़ानून के तहत पेश करदा दरख़ास्त का है जो अबदुर्रशीद अनजोरा मुतवत्तिन जम्मू-ओ-कश्मीर ने दाख़िल करते हुए इन वजूहात से वाक़िफ़ होना चाहा जिन की बिना पर उन्हें हज वफ़द में शामिल करने के लिए मुंतख़ब किया गया है।

उन्हों ने दावा किया कि वो 30 साल से बार में प्रैक्टिस कर रहे हैं और समाजी-ओ-रज़ाकाराना मक़ासिद से वाबस्ता रह चुके हैं।

इस के बावजूद वज़ीर-ए-आज़म और वज़ारत-ए-ख़ारजा के दफ़ातिर ने इन का नाम ख़ैर सगाली हज वफ़द में शामिल नहीं किया।

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