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हज सब्सिडी पर समीक्षा के लिए छह सदस्यों की समिति का गठन

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने छह एक्सपर्ट्स की एक कमिटी बनाई है। यह कमिटी यह पता लगाएगी कि मुस्लिम हज यात्रियों को दी जाने वाली सब्सिडी व्यवहारिक और असरदार है कि नहीं? यह सब्सिडी एयर इंडिया के जरिए सस्ती हवाई यात्रा के जरिए मिलती है। इसके अलावा, हज यात्रा के लिए तय एयरपोर्ट टर्मिनल तक पहुंचने के लिए घरेलू यात्रा में भी मदद दी जाती है।

वहीं, जाने माने गीतकार और पूर्व राज्य सभा सांसद जावेद अख्तर ने इस सब्सिडी को खत्म करने की मांग की है। उन्होंने टि्वटर पर लिखा, ‘आखिरकार सरकार ने एक कमिटी बनाने का फैसला किया जो हज सब्सिडी पर विचार करेगी। अगर इस सब्सिडी को पहले खत्म कर दिया जाता तो बेहतर होता।’

हालांकि, मंत्रालय ने यह साफ कर दिया है कि यह कमिटी बनाने का मतलब यह बिलकुल नहीं है कि सरकार इस सब्सिडी को खत्म करना चाह रही है। मंत्रालय के सूत्रों ने बताया है कि इस कवायद का मकसद पूरे मुद्दे की समीक्षा करना है। बता दें कि हज सब्सिडी पर काफी वक्त से बहस हो रही है। यह मुद्दा कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में भी उठा था।

नवभारत टाइम्स के मुताबिक, बीजेपी सरकार इसकी व्यवहारिकता का पता लगाकर यह जानने की कोशिश करेगी कि इसे ज्यादा तर्कसंगत कैसे बनाया जा सकता है। बता दें कि 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रथा को बंद करने के लिए कहा था। वहीं, हाल ही में एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने भी हज सब्सिडी खत्म करके इस रकम को मुस्लिम लड़कियों की शिक्षा पर खर्च करने की मांग की है।

दिलचस्प बात यह है कि सब्सिडी का मामला उस वक्त सुर्खियों में आया है जब सऊदी अरब ने भारत के सालाना हज कोटे में 34,500 का इजाफा करते हुए इसकी लिमिट 1.70 लाख कर दी है। अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि यह फैसला सालाना हज अग्रीमेंट पर दस्तखत के दौरान हुए।

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