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हज से मुताल्लिक़ हकूमत-ए-हिन्द की नज़र-ए-सानी पॉलीसी का ख़ैर मक़दम । मुहम्मद अहमद उल्लाह का बयान

हज से मुताल्लिक़ हकूमत-ए-हिन्द की नज़र-ए-सानी पॉलीसी पर अपने रद्द-ए-अमल का इज़हार करते हुए वज़ीर अकलीयती बहबूद , वक़्फ़-ओ-उर्दू एकेडेमी मिस्टर मुहम्मद अहमद उल्लाह ने कहा कि ये एक काबिल ख़ैर मक़दम इक़दाम है और इस से ज़्यादा से ज़्य

हज से मुताल्लिक़ हकूमत-ए-हिन्द की नज़र-ए-सानी पॉलीसी पर अपने रद्द-ए-अमल का इज़हार करते हुए वज़ीर अकलीयती बहबूद , वक़्फ़-ओ-उर्दू एकेडेमी मिस्टर मुहम्मद अहमद उल्लाह ने कहा कि ये एक काबिल ख़ैर मक़दम इक़दाम है और इस से ज़्यादा से ज़्यादा मुस्तहिक़ मुस्लमानों को कम अज़ कम एक मर्तबा हज अदा करने के उन के ख़ाब को पूरा करने के लिए सब्सीडी से इस्तिफ़ादा करने का मौक़ा हासिल होगा ।

दरअसल उन्हों ने जून 2011 में वज़ीर ख़ारिजा एस एम कृष्णा को ये तजवीज़ पेश की थी कि हर पाँच साल में एक मर्तबा के बजाय ज़िंदगी में सिर्फ एक मर्तबा मुस्लमान के लिए हज की अदाएगी को महिदूद किया जाय ताकि ज़्यादा लोगों को सब्सीडी से इस्तिफ़ादा करते हुए हज अदा करने का मौक़ा हासिल हो सके । नीज़ हज की अदाएगी साहिब इस्तिताअत मुस्लमान पर ज़िंदगी में एक मर्तबा फ़र्ज़ है ।

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