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हज हाउज़ में रूह परवर मनाज़िर , वालेन्टियर्स आज़मीन की ख़िदमत में दिन रात मसरूफ़

शहर के इंतिहाई मसरूफ़ तरीन इलाक़ा बाग़ आम्मा नामपल्ली में लबे सड़क 3015 मुरब्बा गज़ अराज़ी पर मुहीत अपनी कीमती जायदाद को वक़्फ़ करते हुए आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के वकील मीर अहमद शरीफ़ वल्द मीर फ़ज़ल उल्लाह ने कभी ये नहीं सोचा होगा कि

शहर के इंतिहाई मसरूफ़ तरीन इलाक़ा बाग़ आम्मा नामपल्ली में लबे सड़क 3015 मुरब्बा गज़ अराज़ी पर मुहीत अपनी कीमती जायदाद को वक़्फ़ करते हुए आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के वकील मीर अहमद शरीफ़ वल्द मीर फ़ज़ल उल्लाह ने कभी ये नहीं सोचा होगा कि एक दिन इस इमारत की वसीअ और अरीज़ अराज़ी पर बुलंदो बाला हज हाउज़ तामीर होगा।

जहां से हर साल रियासत से ताल्लुक़ रखने वाले हज़ारों आज़मीने हज तलबीयह की मुक़द्दस गूंज के दरमियान सफ़र मुक़द्दस पर रवाना होंगे । उस वक़्त इस इमारत की दर और दीवार उल्मा , आज़मीने हज और उन के रिश्तेदारों की दुआओं से गूंज उठेंगे और हर साल मौसमे हज के दौरान यहां नूरानी मनाज़िर देखने में आएंगे। जनाब मीर अहमद शरीफ़ के वहमो गुमान में कभी ये ख़्याल तक ना आया होगा कि उन की वक़्फ़ कर्दा इमारत में मुस्लमानों की तरक़्क़ी और बहबूद से मुताल्लिक़ मह्कमाजात काम करेंगे।

बहरहाल हज हाउज़ से आज़मीने हज की रवानगी के मौक़ा पर लोग इस अराज़ी को वक़्फ़ करने वाले मीर अहमद शरीफ़ के हक़ में दुआ कर रहे हैं। क़ारईन! हम ने आज हज हाउज़ का दौरा करते हुए स्पेशल ऑफीसर रियासती हज कमेटी जनाब एस ए शकूर से बात की और इंतेज़ामात पर बग़ौर नज़र दौड़ाई जिस से अंदाज़ा हुआ कि आज़मीने हज को बेहतर से बेहतर ख़िदमात की फ़राहमी में रियासती हज कमेटी ने कोई कसर बाक़ी नहीं रखी कल की तरह आज भी हम ने देखा कि हज कमेटी के स्पेशल ऑफीसर की बार बार दरख़ास्तों और मीडिया के तवस्सुत से की गई अपीलों के बावजूद आज़मीने हज के साथ उन के दोस्त अहबाब की कसीर तादाद हज हाउज़ पहुंच रही है।

8000 से ज़ाइद आज़मीन रियासती हज कमेटी के ज़रीए सफ़र मुक़द्दस पर रवाना हो रहे हैं। एक आज़िम के साथ उसे विदा करने के लिए 15 – 20 रिश्तेदार आ रहे हैं जिस के नतीजा में हज हाउज़ तंग दामिनी का शिकवा कर रहा है। इन वालेन्टियर्स में इंजिनियर्स , एम बी ए , एम सी ए जैसे पेशा वाराना कोर्स के हामिल नौजवान भी शामिल हैं।

आज़मीन की ख़िदमत के जज़्बा ने उन्हें हज वालेन्टियर्स बनने पर मजबूर किया है और इस ख़िदमत को वो अपनी ख़ुश नसीबी से ताबीर करते हैं। वाज़ेह रहे कि हमारे शहर के कई नौजवान कई बर्सों से आज़मीन की ख़िदमात अंजाम देते आ रहे हैं इस तरह वो आज़मीन की ख़िदमत करते हुए अल्लाह ताला और उस के रसूल (स.अ.व) की ख़ुशनुदी हासिल कर रहे हैं और एक मुसलमान के लिए यही सब से बड़ी कामयाबी है।

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