Thursday , December 14 2017

हथियार रखना किसी का मूल अधिकार नहीं, जरुरी नहीं कि सभी नागरिकों को लाइसेंस मिले- दिल्ली हाईकोर्ट

नई दिल्ली। दिल्ली हाइकोर्ट ने निजी सुरक्षा के लिए हथियार रखने के मुद्दे पर कहा है कि हम बिना कानून-व्यवस्था वाले समाज में नहीं रह रहे, जहां लोगों को अपनी सुरक्षा के लिए हथियार रखने या उठाने की जरूरत हो। काेर्ट का कहना है कि हथियार रखना किसी का मौलिक अधिकार नहीं है और आजकल हथियार रखना आत्मरक्षा के स्थान पर ज्यादातर ‘दिखावे और शान के लिए’ है।

काेर्ट ने हथियार के लाइसेंस हेतु एक निजी कंपनी का आवेदन रद्द करते हुए उक्त बात कही। कंपनी को लाइसेंस देने का अनुरोध पुलिस का लाइसेंस प्राधिकार और उपराज्यपाल भी खारिज कर चुके हैं।

अदालत ने कहा कि हथियार कानून का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि नागरिकों को आत्मरक्षा के लिए हथियार मिलें, लेकिन ‘इसका अर्थ यह नहीं है कि सभी नागरिकों को हथियार रखने के लिए लाइसेंस मिलना चाहिए। हथियार का लाइसेंस देना कानून की ओर से मिला हुआ विशेषाधिकार है। किसी व्यक्ति को हथियार रखने का मूल अधिकार नहीं है।

काेर्ट ने कहा कि अाजकल शादियाें में और खुशी के मौके पर गोलियां चलाने के लिए भी हथियारों का प्रयोग हो रहा है। याचिका दायर करने वाले ने कहा था कि वह रोजाना 2-3 लाख रुपए नकद का व्यापार करता है और उसे धन तथा अपना सुरक्षा के लिए हथियार की जरूरत है।

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