Sunday , December 17 2017

हदीसे खैर-मुकद्दस आयतें

(नैयर रब्बानी)आईए, आज सुबह-सवेरे उस मुकद्दस किताब को अलमारी से निकालते हैं जिसे छुए हुए एक जमाना गुजर गया, जिसकी तिलावत का ख्याल भी आप के दिल में शायद ही आता हो, उसपर से गर्द साफ कीजिए, उसे आज खोल ही डाललिए और उसके दिल को टटोलिए।

(नैयर रब्बानी)आईए, आज सुबह-सवेरे उस मुकद्दस किताब को अलमारी से निकालते हैं जिसे छुए हुए एक जमाना गुजर गया, जिसकी तिलावत का ख्याल भी आप के दिल में शायद ही आता हो, उसपर से गर्द साफ कीजिए, उसे आज खोल ही डाललिए और उसके दिल को टटोलिए।

आपने यह मुकद्स किताब खोल डाली। एक जमाने के बाद आपने अपनी आंखो को इसके एक-एक हर्फ के नूर से मुनव्वर किया है। यकीनन आज इस मुकद्दस किताब के एक-एक हर्फ से आप के लिए दुआएं निकल रही हैं। उसे देखना भी सवाब है, छूना भी सवाब है, इसके एक-एक हर्फ पर दस-दस नेकियों की बशारते हैं।

यही वह आयते हैं जिन्होंने कौमों की तकदीर बदल दी और यही वह आयते हैं जिन से रूगर्दानी ने कौमों की तकदीर में तबाही व बर्बादी के फैसले मुकद्दर कर डाले।

आज इस मुकद्दस किताब कुरआने करीम से एक सूरत की शक्ल में चंद मखसूस आयते तिलावत करते हैं। इस मुकद्दस किताब की वह आयते कितनी मुकद्दस, कितनी अजीम और कितनी बाबरकत होंगी जिन्हें खुद अल्लाह तआला ने जमीन व आसमान पैदा करने के हजार बरस पहले तिलावत फरमाई हो, फरिश्तों ने अल्लाह तआला की जबानी यह मुकद्दस आयतें सुनी तो कहने लगे कि खुशहाली है उस उम्मत के लिए जिन पर यह आयतें उतारी जाएंगी और खुशहाली है उन दिलों के लिए जो इसे याद करेंगे और खुशहाली है उन जबानों के लिए जो इसकी तिलावत करेगी।

यह वह आयते हैं जिन के बारे में नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने ख्वाहिश जाहिर फरमाई कि मेरा दिल चाहता है कि यह आयतें मेरे हर उम्मती के दिल में हो। यह कितनी बरकत वाली आयतें होंगी जिनकी तिलावत से हमारी जरूरतें और हाजतें अल्लाह तआला पूरी फरमा देते हैं।

यह कितनी मुकद्दस आयतें होंगी जिन्हें रात में तिलावत करने के बाद अगर कोई शख्स मर जाए तो उसे शहीद होकर मरने की खुशखबरी नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने दी है। यह सवाब के एतबार से इतनी अजीम आयतें हैं कि उनकी तिलावत करने से पूरे दस कुरआने मजीद की तिलावत का सवाब अल्लाह तआला की तरफ से अता कर दिया जाता है।

यह मुकद्दस, मोहतरम, मुकर्रम, अजीम और बाबरकत आयतें एक मुकम्मल सूरत ‘सूरा यासीन’ की शक्ल में जमा कर दी गईं। नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने यह ख्वाहिश जाहिर की कि मेरा दिल चाहता है कि सूरा यासीन मेरे हर उम्मती के दिल में हों।

हजरत अता इब्ने रबाह (रजि0) रिवायत करते हैं कि नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का इरशाद है कि जो शख्स सूरा यासीन की शुरू दिन में तिलावत करेगा उसकी तमाम हाजते अल्लाह तआला पूरी फरमाते हैं।

कौन नहीं चाहता कि उसकी हाजते पूरी हों, उसके अरमान, उसकी ख्वाहिशें, उसकी आरजुएं और उसके सपने पूरे हो, यह तो सब ही चाहते हैं। इसका आसान नुस्खा नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने अपनी उम्मत को यह बता दिया कि सुबह सवेरे सूरा यासीन की बाबरकत आयते तिलावत कर ली जाएं।

इससे अल्लाह तआला उस दिन की तमाम हाजते पूरी फरमा देते हैं।

सूरा यासीन कुरआने मजीद का दिल है और नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की ख्वाहिश भी। नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इसकी तिलावत के बड़े फायदे बयान फरमाए हैं। आप की तिलावत आज फरिश्तों की गिजा का सामान फराहम कर रही है।

यकीन मानिए जिस वक्त आप कुरआने करीम की तिलावत के लिए बैठे हैं उसी वक्त से फरिश्तों का हुजूम आप के गिर्द जमा हो चुका है और फरिश्ते एक दूसरे को आवाज देकर बुला रहे हैं कि आओ हमारी गिजा यहां बट रही है। कुरआन की तिलावत के जरिए आपका एक एक बोल फरिश्तों को गिजा फराहम कर रहा है।

वह सैराब हो रहे हैं, इस पर मजीद यह कि अल्लाह तआल की नजर रहमत आप पर खूब खूब जमी हुई है। अल्लाह तआला पूरे तौर पर मुतवज्जो होकर आप की तिलावत को सुन रहे हैं। सूरा यासीन की तिलावत को अपने ऊपर लाजिम फरमा कर उसे याद कर ले और नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की ख्वाहिश पूरी फरमा दें।

क्या बाईद है कि आप उसे याद करके अपने दिल में बसा लेना आप को दुनिया व आखिरत की दौलतों से मालामाल कर दे और दुनिया भर की इज्जत, दौलत, शोहरत और आखिरत में जन्नतुल फिरदौस की बुलंदियों तक पहुंचा दे। अल्लाह तआला हम सबको सुबह-सवेरे सूरा यासीन की तिलावत की तौफीक नसीब फरमाए- आमीन

———-बशुक्रिया: जदीद मरकज़

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