Saturday , January 20 2018

हदीस शरीफ़

हज़रत अबदुल्लाह बिन अब्बास रज़ी अल्लाहो तआला अन्हो से रिवायत है रसूलल्लाहो सल्लाह अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया एक उमरा से दूसरे उमरा तक के दरमयान तमाम गुनाह माफ़ कर दीए जाते हैं, हज्ज-ए-मबरूर ( नेकियों वाला हज) की जज़ा सिवाए जन्नत के कुछ नहीं है । (बुख़ारी और मुस्लिम )

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