Saturday , December 16 2017

हदीस शरीफ

हज़रत अनस रज़ी अल्लाहो तआला अनहो से रिवायत है रसूल-ए-पाक (स०अ०व०) ने फ़रमाया क़ियामत में जब अहल-ए-मह्शर से हिसाब-ओ-किताब लिया जा रहा होगा तो लोगों का एक ज़म्म-ए-ग़फ़ीर (भीड़) तलवारें कंधों पर रखे हुए जन्नत के दरवाज़े पर पहूंचेगा उन

हज़रत अनस रज़ी अल्लाहो तआला अनहो से रिवायत है रसूल-ए-पाक (स०अ०व०) ने फ़रमाया क़ियामत में जब अहल-ए-मह्शर से हिसाब-ओ-किताब लिया जा रहा होगा तो लोगों का एक ज़म्म-ए-ग़फ़ीर (भीड़) तलवारें कंधों पर रखे हुए जन्नत के दरवाज़े पर पहूंचेगा उन लोगों के ज़ख़मों से ख़ून बहता होगा अहल- ए-मह्शर के दरयाफ़त करने पर बताया जाएगा कि ये लोग शहीद हैं ये मौत के बाद ज़िंदा थे और उन को रिज़्क दिया जाता था । (तबरानी)

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