Monday , August 20 2018

हदीस शरीफ

हज़रत आईशा सिद्दीका रज़ी अल्लाहो तआला अनहा फ़रमाती हैं कि रसूल-ए-पाक(स०अ०व०) अपने वुज़ू करने में जूता पहनने में दाएं को मुक़द्दम(पहले) रखते थे यानी पहले दाएं जानिब कंघा करते फिर बाएं जानिब । (शमाइल तिरमिज़ी)

हज़रत आईशा सिद्दीका रज़ी अल्लाहो तआला अनहा फ़रमाती हैं कि रसूल-ए-पाक(स०अ०व०) अपने वुज़ू करने में जूता पहनने में दाएं को मुक़द्दम(पहले) रखते थे यानी पहले दाएं जानिब कंघा करते फिर बाएं जानिब । (शमाइल तिरमिज़ी)

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