हफ़्ता को सालार जंग म्यूज़ीयम में जश्न दाग़ औ

हफ़्ता को सालार जंग म्यूज़ीयम में जश्न दाग़ औ
हैदराबाद । १५। मार्च : उर्दू ज़बान के माया नाज़ शायर नवाब मिर्ज़ा ख़ां दाग़औ देहलवी सन ( 1831-1905 -ए-) जो जहां उस्ताद , फ़सीह उल-मलिक नाज़िम यार जंग दुबैर अलद विला जैसे ख़ताबात से सरफ़राज़ थे । आप ने उर्दू ज़बान की जो ख़िदमात अंजाम दें की वो

हैदराबाद । १५। मार्च : उर्दू ज़बान के माया नाज़ शायर नवाब मिर्ज़ा ख़ां दाग़औ देहलवी सन ( 1831-1905 -ए-) जो जहां उस्ताद , फ़सीह उल-मलिक नाज़िम यार जंग दुबैर अलद विला जैसे ख़ताबात से सरफ़राज़ थे । आप ने उर्दू ज़बान की जो ख़िदमात अंजाम दें की वो अपनी नज़ीर आप हैं । दाग़ के अहम शागिर्दों में एक तरफ़ अल्लामाइक़बाल थे और दूसरी तरफ़ आसिफ़ सादस नवाब मीर महबूब अली ख़ां निज़ाम आफ़ हैदराबाद ।

हैदराबाद में दाग़ से क़रीबी रब्त रखने वालों में महाराजा सुरक्षण प्रशाद , नवाबअज़ीज़ यार जंग अज़ीज़ , काज़िम अली ख़ां बाग़ , निसार यार जंग मिज़ाज और कैफ़ीहैदराबादी काबिल-ए-ज़िकर हैं । दाग़ दबिस्ताँ दिल्ली के सब से अहम नुमाइंदे रहे हैं क्यों कि उन्हों ने ना सिर्फ इस दबिस्ताँ को नुक़्ता उरूज पर पहुंचाया बल्कि उसे सारे हिंदूस्तान में फ़रोग़ दिया । दाग़ की वजह से दबिस्ताँ दिल्ली हैदराबाद मुंतक़िल होगया और यहीं से सारे हिंदूस्तान में दाग़ और उर्दू ज़बान की धूम मची । दाग़ ने यहीं हैदराबाद में 15 फरवरी सन 1905 -ए-को इंतिक़ाल किया और दरगाह यवसफ़ीनऒ में इन को आख़िरी आराम गाह मिली । एक अर्से से हम सब ने दाग़ को भुला दिया था । अब इक़बाल एकेडेमी इस अज़ीमएल्मर तिब्बत शायर की याद में 17 मार्च हफ़्ता यक रोज़ा जश्न दाग़ का सालार जंग म्यूज़ीयम हाल में एहतिमाम कर रही है ।

जश्न दाग़ 17 मार्च बाद मग़रिब शुरू होगा । इस के अदबी इजलास की सदारत डाक्टर मुहम्मद ज़िया उद्दीन अहमद शकीब करेंगे । ख़ुतबा इस्तिक़बालीया जनाब ज़िया उद्दीन नय्यर सदर इक़बाल एकेडेमी पेश करेंगे । प्रोफ़ैसरफ़ातिमा प्रवीण वाइस प्रिंसिपल उस्मानिया यूनीवर्सिटी कॉलिज आफ़ आर्टस , जनाबइमतियाज़ उद्दीन मोतमिद इक़बाल एकेडेमी हैदराबाद हज़रत दाग़ की ज़िंदगी और शायरी परमक़ालात पेश करेंगे ।

प्रोफ़ैसर मुहम्मद मियां वाइस चांसलर मौलाना आज़ाद उर्दू यूनीवर्सिटी , जनाब एसए हिदी ऐडीशनल डायरैक्टर पुलिस , मुहतरमा लक्ष्मी देवी राज और मिस्टर श्याम गोपाल सनीचर ( नवासा महाराजा किशन प्रशाद ) बहैसीयत मेहमानान एज़ाज़ी अपने तास्सुरात पेश करेंगे । अदबी इजलास के बाद मूसीक़ी का प्रोग्राम शुरू होगा जिस में मुमताज़ गुलूकारा पूर्व अग्रव और गुलूकार साबिर हबीब खासतौर पर हज़रत दाग़ देहलवी की ग़ज़लों को साज़ पर पेश करेंगे । आकाशवाणी के नजम उद्दीन जावेद उस मूसीक़ी प्रोग्राम के हिदायतकार हैं ।

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