Sunday , January 21 2018

हमारा मकसद जरूरतमंदों की खिदमत : ज़हीर उद्दीन अली खान

अगर आपको खिदमत करनी है तो घड़ी मत देखो और वक्फ करना हो तो खर्च मत देखो बुजुर्गों की तरफ से कहा जाने वाला यह पैग़ाम आबिद अली खान एजुकेश्नल ट्रस्ट व मिल्लत फंड की तरफ से समाज खासकर अक्लियतों के लिये की जा रही खिदमात पर सही बैठता है |

समाज के लिये वक्फ इस ट्रस्ट की तरफ से गरीब, गैर तालीफ याफ्ता, तालीफ याफ्ता तब्के के अलावा दूसरे तब्के के लिये जिस तरह की खिदमत की जा रही है, वह लाजवाब है |

उर्दू रोज़नामा सियासत डेली के मैनेजिंग एडीटर जनाब ज़हीर उद्दीन अली खान , जो इन तमाम खिदमात की देखरेख करते हैं ने हिंदी रोज़नामा ‘मिलाप ‘ को बताया कि समाज यानी मआशरे के लिये फिक्रमंद आबिद अली खान साहब व जिगर साहब ने हैदराबाद में पुलिस एक्शन के वक्त यहां उभरे फिर्कावाराना माहौल की वजह से मुसलमानों को मुल्क की Mainstream से जोड़ने के लिये 15 अगस्त , 1949 को उर्दू अखबार रोज़नामा ” सियासत डेली” की शुरूआत की |

इसके बाद अक्लियती मआशरे के लिये कई तरह की खिदमात शुरू कियें गयें | उन्होने बताया कि उनके बाद इन कामों को सियासत के चीफ एडीटर ज़ाहिद अली खान साहब ने ज़ारी रखा |

अब इन कामों की देखरेख खुद ( ज़हीर उद्दीन अली खान ) कर रहे हैं | उन्होने बताया कि अब कामों ( खिदमात ) की तौसीअ काफी बढ़ गयी है | दिगर तबको को भी इन खिदमात से फायदा कराया जा रहा है | आज के इस जदीद दौर में तकनीकी के ज़रिये मआशरे को बेदार किया जा रहा है |

इसमें तालीम याफ्ता नौजवानो को उर्दू व अंग्रेजी ज़ुबान में कंप्यूटर ट्रेनिंग देना, फ़न हौसला अफ्ज़ाई के तहत ‘ आर्ट गैलरी ‘ पेंटिंग नुमाइश मुनाकिद करना व ट्रेनिंग , कुरआन ए पाक के पैगामों में छिपे साइंस को पेंटींग के ज़रिये से समाज के सामने पेश करना , समाज की बुराइयों को दूर करने के लिये बेदारी की मुहिम चलाना, नौजवान नस्ल में वालिदैन के तईन इज़्ज़त का जज़्बा जगाने के लिये कोशिश करना, उर्दू ज़ुबान की तश्हीर करना व बिना जहेज़ शादी करना शामिल है |

इसके साथ ही मरकज़ व रियासत की हुकूमत की तरफ से स्टूडेंट्स के लिये अमल में लाई जा रही स्कालरशिप्स स्कीम्स का फायदा दिलाने के लिये शुरू की गयी ” फ्री हेल्प लाईन सर्विस” भी इसमें शामिल है |

उन्होने फिक्र जताते हुए कहा कि मआशरे में बिना जहेज़ की शादी वली रिवायत खत्म होती जा रही है | इसे ‘ स्टेटस सिंबल’ कहे या मजबूरी . लेकिन शादी पर ज़्यादा से ज़्यादा खर्च करने का रिवाज़ बढ़ता जा रहा है \ इसकी वजह से यह रिवायत गरीब के गले की फाँस बनती जा रही है और इसका असर पूरी रियासत की इक्तेसादी सिस्टम पर पड़ रहा है |

इसलिये ट्रस्ट ने बिना जहेज़ शादी करवाने का बीड़ा उठाया है और काफी हद तक इसमे कामयाबी भी मिल रही है | ज़हीर उद्दीन अली खान साहब बताते हैं कि अब तक तीन हजार से ज़्यादा बिना जहेज़ शादी हो चुकी है |

इसी तरह तालीम याफ्ता लड़कों और लड़कियों की शादी करवाने के मकसद से मुख्तलिफ प्रोगाम मुनाकिद की जाती है | इसके तहत पहले वालिदैन को फ्री रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ता है जिसमें शादी के काबिल लड़्को व लड़कियों की तस्वीर अलबम जोड़ दी जाती है |

जिसे भी अपने बेटे या बेटी की शादी करनी हो वे सियासत के दफ्तर आकर तस्वीर व बायोडाटा देखकर लड़का व लड़की पसंद करते हैं | और बाद में दोनो खानदान को बुलाकर बात कराई जाती है और रिश्ते जोड़े जाते हैं | इस्के बाद दोनो खानदान वालों को बिना जहेज़ शादी के लिये हौसला अफ्ज़ाई की जाती है |

ज़हीर साहब ने बताया कि पूरे अमल का रिकार्ड महफूज़ रखा जाता है | रोज़गार के लिये किये जा रहे कोशिशों के तहत करीब 17 हजार से ज़्यादा नौजवानों को हाइटेक सिटीमे अच्छी तंख्वाह पर नौकरियाँ दिलायी गयी है |

इसके इलावा करीब 7 साल पहले शुरू की गयी स्कालरशिप हेल्प लाईन के ज़रिये बड़ी तादाद में नौजवानों को स्कालरशिप्स का फायदा दिलाया गया व टीएसपीएससी के इम्तेहानात के लिये तैयार किया गया |

उन्होने आगे कहा कि दसवी क्लास के स्टूडेंट्स के लिये अंग्रेजी, तेलुगू व उर्दू ज़ुबान में Question Bank फ्री में दिया जाता है इसके इलावा ‘कैलीग्राफी ‘ की ट्रेनिंग भी दी जाती है अब तक तकरीबन 300 स्टूडेंट्स इससे फायदा ले चुके हैं |

दक्कन रेडियो के बारे में ज़हीर उद्दीन अली खान ने कहा कि मआशरे के लिये एक स्टेज है | मामूली रेट पर सभी इसके इस्तेमाल से अपनी बात दूसरों तक पहुँचा सकते हैं |

इसके इलावा उर्दू ज़ुबान सीखने के लिये खाहिंशमंद लोगो के लिये फ्री किताबों का सेट दस्तयाब कराया जाता है और हर जनवरी व जून के महीने में इम्तेहान मुनाकिद की जाती है |

साल 1994 से शुरू किये गये इस प्रोग्राम के ज़रिये से अब तक तकरीबन 6 लाख 62 हजार से ज़्यादा लोगों ने उर्दू ज़ुबान सीखी है |

अब नई तकनीकी/ टेक्नालोजी के ज़रिये उर्दू सिखाने जिसमें घर बैठे उर्दू सीखी जा सकती है, के लिये ‘ लर्न बेसिक उर्दू थ्रू कंप्यूटर’ नाम की सीडी भी फराहम करायी जा रही है

उन्होने मआशरे के उन नौजवानों के सुलूक को लेकरफिक्र ज़ाहिरा किये जो अपने वालिदैन की इज़्ज़त करना भूलते जा रहे हैं |

इसकी वजह से कुकुरमुत्तों की तरह Harborage का कल्चर बढ़ रहा है |

सियासत की ओर से वालिदैन की इज़्ज़त करने के मुताल्लिक कुरआन मे दी गयी तालीमात व हिदायत को अखबारात के ज़रिये से मआशरे के हर शख्स तक पहुंचाया जा रहा रहा है |

कुल मिलाकर इदारा सियासत की तरफ से मआशरे के लिये वक्फ का जज़्बा रखते हुए की जा रही खिदमात से हर तबके के लोगो को फायदा होगा और हौसला अफ्ज़ाई लेकर आगे बढ़ेगा , यही उम्मीद है |

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