हमारे समय में अच्छी तरह रो पाने से ज्यादा कुछ करने को नहीं था, सारा मजा तो हेलेन लेती थी : शर्मिला टैगोर

हमारे समय में अच्छी तरह रो पाने से ज्यादा कुछ करने को नहीं था, सारा मजा तो हेलेन लेती थी : शर्मिला टैगोर
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मुंबई : शर्मिला टैगोर मानती हैं कि उनके दौर में हीरोइनों के पास अपने रोल के साथ एक्सपेरिमेंट करने के ज्यादा मौके नहीं मिलते थे. इसीलिए उस दौर में हेलेन और अन्य नेगेटिव रोल वाली अदाकारों को ही काम करने का असली लुत्फ मिल पाता था. शर्मिला मानती हैं कि आज के दौर और उस पुराने समय में बहुत अंतर था. उन्होंने कहा, हमारे समय में अच्छी तरह रो पाने से ज्यादा कुछ करने को नहीं था. हमें खुद को असहाय दिखाना पड़ता था, इसलिए मुझे लगता है कि आज की हीरोइनों को काम करने में ज्यादा मजा आ रहा होगा.

सिनेमा की दुनिया में सत्यजीत रे की खोज मानी जाने वाली शर्मिला ने बताया कि उनके दौर में हीरोइनों के जीवन में ज्यादा रोमांच नहीं था. उन्होंने कहा, “मुख्य हीरोइन नकारात्मक भूमिकाएं नहीं निभाती थीं, इसलिए हेलन ही सारा लुत्फ उठाती थीं. हीरोइनों के जीवन में ज्यादा रोमांच नहीं होता था. आज की एक्ट्रेसेज के पास पहले की तुलना में काफी बेहतर मौके हैं.

‘अमर प्रेम’ और ‘आराधना’ जैसी फिल्मों की अभिनेत्री शर्मिला का कहना है कि उस दौर में निरंतरता बनाए रखना मुश्किल था. उन्होंने कहा, इसके अलावा, हम एक समय में तीन या चार फिल्मों में काम करते थे, इसलिए भी मुश्किलें आती थीं, क्योंकि आज आमिर खान अपना वजन बढ़ा, घटा सकते हैं, हम ऐसा नहीं कर सकते थे.

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