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हम कुछ बोलेंगे तो पाकिस्तानी बता दिये जाएंगेः मुनव्वर राणा

नई दिल्ली. एक टीवी चैनल के लाइव शो में उर्दू के मशहूर शायर मुनव्वर राणा ने 14 मुसन्निफो और अदीबों के बीच अपना अदीब अकादमी अवॉर्ड लौटा दिया. रायबरेली में पैदा हुए इस मशहूर शायर ने अपना अवॉर्ड लौटाने के बाद कहा कि, “हम कुछ बोलेंगे तो फौरन पाकिस्तानी बता दिये जाएंगे. फौरन कहा जाएगा कि आप अब पाकिस्तान चले जाइए.

अभी बिजली के तार इस मुल्क में जुड़ नहीं पाए…मुसलमानों के तार दाउद इब्राहिम से जोड़ दिए जाते हैं.” उन्होंने कहा कि, “मैंने सोचा कि मैं ज़रा सुन लूं लोगों की बातें, क्योंकि मेरे लिए बोलना बड़ा मुश्किल काम है, इसलिए कि कोई कम्युनिस्ट पार्टी का बताया जा रहा है…कोई कांग्रेस का बताया जा रहा है… बदकिस्मती से हम मुसलमान भी हैं.”

साथ ही मुनव्वर ने टीवी शो पर यह ऐलान भी किया कि वह अपनी ज़िंदगी में अब कभी भी कोई सरकारी अवार्ड नहीं लेंगे. उन्होंने कहा कि, “आखिरी उम्र में हूं. बंगाल उर्दू अकादमी में मैं बीस साल तक था, मैंने कभी कोई अवॉर्ड नहीं लिया. मैंने किसी अकादमी में अपनी किताब शामिल ही नहीं की. मैंने शायद गलती से यह अवॉर्ड ले लिया हो. मैं यह वादा करता हूं कि मैं अपनी जिंदगी में कोई सरकारी अवॉर्ड नहीं लूंगा…नीलकमल की सरकार हो, हाथी की हो, घोड़े की हो, मुर्गी की हो.”

अखलाक मर्डर के बारे में बताते हुए मुनव्वर ने कहा, “जिस दिन अखलाक का कत्ल हुआ था, मैं दोहा के मुशायरे में था. वहां लोगों ने मुझे बताया…वहां बहुत से पाकिस्तानी भी थे…सब थे. सब लोगों ने जानना चाहा कि मेरा इस पर मैं क्या कहना है? लेकिन दाग देहलवी का शेर है- नज़र की चोट जिगर में रहे तो अच्छा है… ये बात घर की है, घर में रहे तो अच्छा है.”

मुनव्वर ने कहा कि अभी आप ये सोचिए कि खौफ का यह आलम है कि 10 तारीख को मुझे पाकिस्तान मुशायरे में जाना था मैं नहीं गया…कल को ये बोल दे कि ये पाकिस्तान से कुछ सीख कर आये हैं…तो इतनी नफरत के माहौल को दूर करने के लिए हर शहरी भी जिम्मेदार है और एक शहरी की तरह मोदी जी भी जिम्मेदार हैं.

गौरतलब है कि हिंदुस्तानी उर्दू अदबी में मुनव्वर राना एक बेहद मकबूल नाम है. मुनव्वर राना ने उर्दू ही नहीं, बल्कि हिंदी में भी ढेरों गजलें, और शायरियां लिखी हैं. मुनव्वर की पैदाइश यूपी के रायबरेली में हुआ था. हिंद-पाक बंटवारे के वक्त मुनव्वर के दादा पाकिस्तान चले गए थे जबकि उनके वालिद हिंदुस्तान में रुक गए. रायबरेली में कुछ साल रहने के बाद मुनव्वर राना का खानदान कोलकाता चला गया. उनके मशहूर क्रिएशंन में ‘मां’ पर लिखी गईं उनकी सफी हर दिल को झिंझोड़ कर रख देती हैं.

माँ, ग़ज़ल गाँव, पीपल छाँव, बदन सराय, नीम के फूल, सब उसके लिए, घर अकेला हो गया, कहो ज़िल्ले इलाही से, बग़ैर नक़्शे का मकान, फिर कबीर, नए मौसम के फूल मुनव्वर की मशहूर गोशां हैं. उऩ्हें Literature Academy Award 2014 में दिया गया था जो कि उन्होंने एक टीवी शो में हुकूमत को लौटा दिया.

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