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हम दिखावे का नहीं असल तरक़्क़ी चाहते हैं : नीतीश

पटना : वजीरे आला नीतीश कुमार ने बुध को कहा कि हम दिखावे का नहीं असल तरक़्क़ी चाहते हैं। यही हमारे तरक़्क़ी का मॉडल है। इंसानी तरक़्क़ी होगा तो लोगों का तरक़्क़ी होगा। सिर्फ जीडीपी बढ़ने से तरक़्क़ी नहीं होगा। हर घर तक तरक़्क़ी की रोशनी पहुंचे, सबको मौका मिले, किसी से तनाज़ा न हो तभी तरक़्क़ी मुमकिन है। तरक़्क़ी का यह मतलब नहीं कि अमीर व गरीब और पीछे रह जाएं।

वजीरे आला सेक्रेट्रिएट वाकेय हॉल में महादलित, अक्लियत, इंतेहाई पसमानदा तबके अक्षर आंचल मंसूबा में काम कर रहे टोला सर्विस देने वालों व तालीमी मरकज एनजीओ की तरफ से मुनक्कीद तकरीब को खिताब कर रहे थे। कहा कि आज टोला सेवक और तालीमी मरकज के लोगों का जो बनावट है, उसे मैंने असली जामा पहना दिया।

महादलित और इंतेहाई पसमानदा तबके के टोलों में बीस हजार सेंटर और अक्लियत टोलों में दस हजार तालीमी मरकज सेंटर खोलने का टार्गेट था। आज 19,414 उत्थान सेंटर व 8,539 तालीमी मरकज कम कर रहे हैं। टोला सेवकों एवं तालीमी मरकज के लोगों को 3,500 महना तंख्वाह मुकर्रर किया। इसे 2013 में बढ़ाकर पांच हजार किया गया।

अगस्त 2015 से इनका तंख्वाह आठ हजार करने का फैसला लिया गया है। साथ ही साठ साल की उम्र तक काम लेने और सर्विस में मौत होने पर एकमुश्त चार लाख की ग्रांट रकम देने की मंजूरी दी गई है।

एससी एसटी जाति कमीशन के सदर विद्यानंद विकल, तालीम महकमा के प्रिन्सिपल सेक्रेटरी आरके महाजन, टोला सेवक अमर राज, बद्रीनाथ मांझी, तालीमी मरकज के मोहम्मद अब्दुल ने भी ख्याल रखे।

 

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