Tuesday , December 12 2017

‘हम मुसलमानों को नौकरी नहीं देते’: मोदी के मंत्रालय का जवाब

नई दिल्ली: भारतीय संविधान की मूल भावना को दरकिनार करते हुए नरेंद्र मोदी सरकार के आयुष मंत्रालय ने धर्म के आधार पर नौकरियां देने की बात स्वीकार कर ली है, आयुष मंत्रालय ने एक RTI के जवाब में कहा कि वो मुसलामानों को नौकरियां नहीं देते और इसी वजह से आयुष मंत्रालय में कोई भी मुसलमान नहीं है. RTI में पूछा गया था कि योग सिखाने वाले कितने मुसलमान टीचरों ने वर्ल्ड योग डे में आयुष की तरफ से हिस्सा लिया था

इसका खुलासा मशहूर जर्नलिस्ट पुष्प शर्मा की रिपोर्ट में किया गया है जो मिली गजट के अगले इशू में प्रकाशित होगी। जर्नलिस्ट ने RTI दाख़िल करके इस बारे में पूछा था और जब जवाब आया तो वो चौकाने वाला था. मंत्रालय ने बताया कि कुल 711 मुसलमान योग गुरुओं ने लघु-अवधि असाइनमेंट पर बाहर सिखाने जाने के लिए दरख़ास्त डाली थी लेकिन किसी को भी इंटरव्यू के लिए नहीं बुलाया गया जबकि 26 ट्रेनर्स(सभी हिन्दू) को इस काम के लिए चुन लिया गया.मंत्रालय ने ये भी बताया कि 3841 मुसलमान लोग अक्टूबर 2015 तक योग टीचर बनने के लिए दरख़ास्त दे चुके हैं, लेकिन एक भी चुना नहीं गया है.

आयुष मंत्रालय के जवाब में जिस तरह की भाषा का प्रयोग किया गया है वो भी अपने आप में निंदनीय है जहां वो सीधे तौर पर जवाब देती है, “सरकारी पालिसी के हिसाब से- किसी भी मुसलमान को नहीं बुलाया गया था, ना ही चुना गया है और ना ही विदेश भेजा गया है”

पुष्प शर्मा इस बारे में कहते हैं कि आजकल जो कम्युनल हालात हुए हैं वो सब मोदी सरकार की कम्युनल नफ़रत की वजह से है. उन्होंने ‘सबका साथ सबका विकास’ के नारे लगाने वाली सरकार की नफ़रत नीति की आलोचना की.

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