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हरम शरीफ में मुसल्लियों को 200 रियाल में जगह

हरम शरीफ़ में नमाज़ की अदायगी के लिए ख़ास जगह को महफ़ूज़ करने का नापसंदीदा अमल ज़ोर पकड़ रहा है। कई ख़ूवातीन महिज़ अपनी आमदनी के लिए हरम शरीफ़ में इन मुसल्लियों के लिए जगह महफ़ूज़ करती हैं, जो ताख़ीर से आते हैं। ये ख़वातीन अपने हैंड बैग सामान औ

हरम शरीफ़ में नमाज़ की अदायगी के लिए ख़ास जगह को महफ़ूज़ करने का नापसंदीदा अमल ज़ोर पकड़ रहा है। कई ख़ूवातीन महिज़ अपनी आमदनी के लिए हरम शरीफ़ में इन मुसल्लियों के लिए जगह महफ़ूज़ करती हैं, जो ताख़ीर से आते हैं। ये ख़वातीन अपने हैंड बैग सामान और कुर्सियां नमाज़ की जगह पर रख कर उसे महफ़ूज़ करलेती हैं।

ये जगह हासिल करने के लिए हरम शरीफ़ ताख़ीर से पहूंचने वाले अफ़राद रियाल अदा करते हैं। हरम शरीफ़ में मुनासिब जगह पर नमाज़ पढ़ने की ख़ाहिश रखने वाले आज़मीन सारे उनके लिए एक फ़सल की जगह के एवज़ 200 रियाल अदा करते हैं। अफ़्रीक़ी ख़वातीन की अक्सरीयत इस काम में मसरूफ़ हैं। ये ख़वातीन अपने बच्चों को भी जगह पर बिठा देती हैं ख़ासकर जुमा की शब हरम शरीफ़ में ज़बरदस्त हुजूम रहता है। उस दिन जगह रिज़र्व करने का कारोबार ज़ोर पर होता है।

पीर और जुमेरात को भी यहां हुजूम रहता है।हरम शरीफ़ में ख़िदमत अंजाम देने वाली ख़ातून गाईड्स इस तरह का मुनाफ़ा कमाने वाले ख़वातीन का पता चला कर उन्हें ऐसा करने से रोकती हैं। इस के बावजूद अफ़्रीक़ी ख़वातीन अपनी हरकतों से बाज़ नहीं आती। ये जगह ख़ासकर हनयान, बिलाल और शाह अबदुलअज़ीज़ बाबुद-दाख़िलों के क़रीब महफ़ूज़ करली जाती हैं।हाल ही में मुफ़्ती-ए-आज़म शेख़ अबदुलअज़ीज़ ने फ़तवा जारी करते हुए इस अमल को इस्लामी तालीमात के मुग़ाइर क़रार दिया था।

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