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हसीना तौहीन ए रिसालत क़ानून के ख़िलाफ़

ढ़ाका, 09 अप्रैल: बांग्लादेश की वज़ीर ए आज़म शेख हसीना ने मुल्क में नया तौहीन ए रिसालत मुखालिफ क़ानून बनाने की मांग को सख्ती से नामंजूर कर दिया है।

ढ़ाका, 09 अप्रैल: बांग्लादेश की वज़ीर ए आज़म शेख हसीना ने मुल्क में नया तौहीन ए रिसालत मुखालिफ क़ानून बनाने की मांग को सख्ती से नामंजूर कर दिया है।

बीबीसी को दिए इंटरव्यू में शेख हसीना ने कहा कि मुल्क में पहले से मौजूद कानून ईशनिंदा करने वालों को सज़ा देने के लिए काफी हैं।

उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब पिछले हफ्ते ही हिफ़ाजत-ए-इस्लाम के बैनर तले हज़ारों इस्लामी कारकुनो ने इस्लाम या पैगंबर मोहम्मद ( स०अ०व०) की तौहीन करने वालों के लिए कड़ा कानूने बनाने की मांग को लेकर राजधानी ढाका में बड़ी रैली मुनाकिद की थी।

बीबीसी को दिए इंटरव्यू में हसीना ने कहा, ”उन्होंने इसकी मांग की है। लेकिन वास्तव में हमारा ऐसा कोई संसूबा नहीं है (नया कानून लाने की)। हमें इसकी ज़रूरत नहीं है। उन्हें यह समझना चाहिए कि मौजूदा कानून ही इसके लिए काफी हैं।”

उन्होंने कहा,”यह एक सेक्युलर मुल्क है। इसलिए हर मज़हब को आज़ाद और मुंसिफाना तौर पर अपने मज़हब पर अमल करने के हुकूक है। लेकिन किसी की मज़हबी जज़बातो को ठेस पहुंचाना ठीक नहीं है। हम हमेशा मज़हबी जज़बातो की हिफाज़त करने की कोशिश करते हैं।”

एहतिजाजियों ने अपनी मांगों को पूरा करने के लिए हुकूमत को तीन हफ़्ते का वक्त दिया है। इसमें ऐसे लोगों के लिए कड़ी सज़ा की मांग की गई है, जो ख़ुद को क़ाफिर बताते हैं और जो इस्लाम के खिलाफ इस्तेआल अंगेज़ तब्सिरा करने के गुनाहगार हैं।

हसीना ने कहा,”हम सभी मांगों को देखेंगे, अगर उनमें से कोई मुनासिब होगी, तो हम उसे पूरा करेंगे। अगर यह हमारे समाज और मुल्क के मुनासिब और मुताल्लिक नहीं है तो हम इसे कुबूल नहीं करेंगे।”

शेख हसीना ने पिछले हफ्ते मज़हबी जज़बातो को चोट पहुंचाने के इल्ज़ाम में हुई चार ब्लॉगरों की गिरफ़्तारी के हुकूमत के फैसले का भी बचाव किया।

इस गिरफ़्तारी के बाद आठ ब्लॉगरों की वेबसाइट को बंद कर दिया गया था। इसे देखते हुए एतेदाल पसंदों ( Liberals) ने हुकूमत पर इस्लामिक तंज़ीमो के दबाव में काम करने का इल्ज़ाम लगाया था।

लेकिन वज़ीर ए आज़म ने इन इल्ज़ामों को खारिज करते हुए कहा, ”नहीं।।नहीं। अगर किसी ने किसी मज़हब या किसी मज़हबी लीडर के जज़बातो को चोट पहुंचाने की कोशिश की तो, यहां कानून हैं और हम किसी भी तरह की कार्रवाई कर सकते हैं।”

शेख हसीना ने 1971 के अज़ादी के दौरान पाकिस्तान से हाथ मिलाने वाले और लोगों पर ज़ुल्म करने वालों के लिए बने खास जंगी जराइम ट्रीब्यूनल(Special war crimes tribunal) की तनकीदों को भी खारिज कर दिया।

मुल्क की सबसे बड़ी इस्लामिक पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने मुज़ाहिरा करते हुए जंगी जराइम के इल्ज़ामात का सामना कर रहे अपने लीडरों की रिहाई की मांग की थी।

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