हाँ,मांगते हैं! मांगने का अंदाज़ अलग है….!

हाँ,मांगते हैं! मांगने का अंदाज़ अलग है….!

हैदराबाद 14 फरवरी( ख़ुसूसी रिपोर्ट) बाअज़ जहॉ नदीदह अफ़राद कहते हैं कि रिश्वत सरकारी ओहदे के बतन (पेट)से जन्म लेता है और ये कि रिश्वतखोर ओहदेदार अपनी तनख़्वाह में जब तक रिश्वत की चाशनी शामिल ना करलें उन्हें अपनी तनख़्वाह नज़र ही नह

हैदराबाद 14 फरवरी( ख़ुसूसी रिपोर्ट) बाअज़ जहॉ नदीदह अफ़राद कहते हैं कि रिश्वत सरकारी ओहदे के बतन (पेट)से जन्म लेता है और ये कि रिश्वतखोर ओहदेदार अपनी तनख़्वाह में जब तक रिश्वत की चाशनी शामिल ना करलें उन्हें अपनी तनख़्वाह नज़र ही नहीं आती..पता नहीं ये ख़्याल किस हद तक सहीह है , मगर ज़ेर नज़र तस्वीर को देख कर शायद आप भी इस ख़्याल से मुत्तफ़िक़ होजाएं कि चालान के बगै़र ट्रैफ़िक पोलीस और मक्कारी के बगैर गदागरी, अब सिवाए ख़ुशफ़हमी के कुछ नहीं । मांगने वाले अफ़राद में फ़र्क़ सिर्फ इतना है कि एक आजिज़ी ,मक्कारी और चालबाज़ी के ज़रीया भोले भाले लोगों की जेब काटता है और दूसरा ,आँख दिखाकर ,रोब जता कर और क़ानून से डराकर जेब से पैसे निकलवा लेता है ।

एसे बस स्टापस पर जहां आटो पार्क करदेने की वजह से बसों के लिए माली या किसी भी किस्म की मुश्किलात पैदा होते हूँ ,उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई केलिए आरटीसी मोबाइल मौजूद है ,जो पहले फ्लाइंग उसको एड के तेहत था जिसमें एक इन्सपैक्टर ओ दो एस आई हुआ करते थे और उन्हें कम-अज़-कम 60 चालान करना पड़ता था ताहम अब उस की जगह कंट्रोल रुम से रोज़ाना की असास पर जिस पोलीस अमले को ज़िम्मेदारी दे जा रही है उन्हें रोज़ाना कम अज़ कम एक सौ चालान करना ज़रूरी क़रार दिया गया है ,लिहाज़ा वो अपने इस टार्गेट को पूरा करने के चक्क्र में हदूद (Bus Bay) से हट कर भी अपनी वर्दी का रोब जता कर चालान कररहे हैं।

दिलचस्प बात ये है कि आरटीसी मोबाइल के नाम परारटी सी ड्राईवर भी आटो को रोक कर चालान की धमकी दे कर खुले आम रिश्वत ले रहे हैं ,क्या पोलीस के पास अमले की कमी होगई है? ।दूसरी तरफ़ एक सेहत मंद नौजवान दिन भर हाथ में दपड़ा लेकर क़व्वाली गाते हुए घर घर भीक मांगता है और शाम होते ही अपनी नई पैशन गाड़ी पर सैरो तफ़रीह पर निकल जाता है ,

बावसूक़ ज़्ज़राए के मुताबिक़ गदागरी के ज़रीया एसे नौजवान यौमिया पाँचता छः सौ रुपय बा आसानी कमा लेते हैं , बताया जाता है कि ज़ाती घर और ज़ाती गाड़ी के मालिक ये लोग उमूमन ख़वातीन को ठिगने में माहिर होते हैं जिन्हें मोर के पंख और अवदान के ज़रीया चंद ही दिनोंमें उनकी सारी परेशानियां दूर करदेने का ख़ाब दिखाकर सौ पच्चास ईंठ लेते हैं,अफ़सोसनाक पहलवेआ है कि उसे गदागरों की अक्सरियत रात मेंमए नोशी के अड्डे परपाबंदी से रवाना होजाते हैं।

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