हादिया मामला: किसी ने सही व्यक्ति से निकाह किया है या नहीं, ये बताना कोर्ट का काम नहीं- सुप्रीम कोर्ट

हादिया मामला: किसी ने सही व्यक्ति से निकाह किया है या नहीं, ये बताना कोर्ट का काम नहीं- सुप्रीम कोर्ट

केरल के चर्चित हादिया मामले में सुप्रीम कोर्ट  ने कहा कि यह अदालत का काम नहीं है कि किसी ने सही व्यक्ति से निकाह किया है या नहीं? पंसद के व्यक्ति से शादी करने के मामले में अदालत का दखल नहीं बनता।

हादिया मामले में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि किसी वयस्क द्वारा अपनी पंसद से शादी करने के निर्णय पर अदालत दखल नहीं दे सकती।

पीठ ने कहा कि हम यह नहीं कह सकते यह शादी उसके हित में नहीं है। यह अदालत का काम नहीं है कि वह यह तय करें कि किसी व्यक्ति द्वारा लिए गए शादी का निर्णय सही है या नहीं? हम इस आधार पर विवाह को शून्य करार नहीं दे सकते कि जिस व्यक्ति से महिला ने शादी की है वह सही चयन नहीं है।

मालूम हो कि केरल हाईकोर्ट ने हिन्दू धर्म से इस्लाम धर्म कुबूल कर हादिया द्वारा मुस्लिम युवक शफीन जहां से की गई शादी को शून्य करार दिया था और हादिया को उसके पिता की कस्टडी में भेज दिया था।
गुरुवार को सुनवाई के दौरान हादिया के पिता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने केरल हाईकोर्ट के फैसले को सही बताते हुए कहा कि उपलब्ध तथ्य व साक्ष्यों पर शादी को शून्य करार दिया गया था।

मालूम हो कि हादिया ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा था कि वह मुस्लिम है और मुस्लिम ही बना रहना चाहती है। उसने कहा कि उसने अपनी मर्जी से इस्लाम धर्म कुबूल किया है और शादी की है। उसने कहा है कि वह अपने पति के साथ जीवन व्यतीत करना चाहती है। फिलहाल अदालती निर्देश के तहत हादिया अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी कर रही है।

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