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हामिलियन मुफ़ाद को ख़ाक-ए-लहद बग़ैर अमन नामुमकिन : कश्मीरी वज़ीर

जम्मू: पीपल्ज़ डेमोक्रेटिक पार्टी लीडर और जम्मू-कश्मीर के वज़ीर-ए-तालीम नईम अख़तर ने आज कहा कि जब तक तमाम हामिलियन मुफ़ाद को एतिमाद में ना लिया जाये, इस रियासत में अमन और तरक़्क़ी मुम्किन नहीं। आप देखिए कि (बातचीत का) कोई अमल महेज़ कोई बटन दबा देने से शुरू या इख़तेताम पज़ीर नहीं होता है।

ये मुसलसल अमल है, मुफ़्ती (मुहम्मद सईद) साहिब ने ये कहा था और वो यही कहते आए हैं कि जब तक हम तमाम हामिलियन मुफ़ाद को साथ नहीं लेते हैं तब तक ना अमन मुम्किन है और ना ही तरक़्क़ी, अख़तर ने आज यहां मीडिया के नुमाइंदों को ये बात बताई। वज़ीर-ए-आज़म की जानिब से 7 नवंबर को जम्मू-ओ-कश्मीर को अपने दौरे के दौरान मालना 80,000 करोड़ रुपये के पैकेज पर अपोज़िशन के उठाए गए सवालात पर अख़तर ने कहा कि ये रक़म उस रियासत की मईशत को फ़रोग़ देने में मदद देगी।

इन्होंने कहा कि अपोज़िशन का काम हर चीज़ पर एतराज़ करना होता है। मुतास्सिरीन सेलाब को राहत और मुआवज़ा हासिल हुआ और अब हम रीलीफ़ और मुआवज़ा की हुसूलयाबी के इंतेज़ार में नहीं रहेंगे। हम इस रियासत को तरक़्क़ी की राह पर डालेंगे। ये 80,000 करोड़ रुपये जो हमारे मामूल के बजट के इलावा हैं, इस रियासत में ख़र्च किए जा रहे हैं जिससे रियासती मईशत को फ़रोग़ मिलेगा।

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