Wednesday , January 24 2018

हालत-ए- नशा में गाड़ी चलाने वालों की अब ख़ैर नहीं

शहर में हालत नशा में गाड़ियां चलाने के वाक़ियात में मुसलसल इज़ाफ़ा होरहा है हालाँकि हैदराबाद ट्रैफिक पोलीस ने इस लानत पर क़ाबू पाने के लिये

शहर में हालत नशा में गाड़ियां चलाने के वाक़ियात में मुसलसल इज़ाफ़ा होरहा है हालाँकि हैदराबाद ट्रैफिक पोलीस ने इस लानत पर क़ाबू पाने के लिये
मुतअद्दिद इक़दामात कररही है । अब इस ने हालत नशा में गाड़ियां चलाने के आदी ड्राईवरस को सबक़ सिखाने के लिये उन के बारे में तफ़सीलात मंज़रे आम पर
लाने का फैसला किया है । हालत -ए-नशा में ड्राइविंग के बाइस कई हादिसात पेश आरहे हैं और कीमती जानें ज़ाए होरही हैं । इस सिलसिला में ट्रैफिक
पोलीस इस तरह के ख़ाती ड्राईवरस को सज़ाए कैद और उन के लाईसैंसों की मंसूख़ी जैसे सख़्त इक़दामात करने पर भी सरगर्मी से ग़ौर कररही है । वाज़िह
रहे कि हैदराबाद ट्रैफिक पोलीस ने हालत -ए-नशा में गाड़ियां चलाने वालों के ख़िलाफ़ ख़ुसूसी मुहिम छेड़ रखी है । ये मुहिम गुिज़शता साल नवंबर में
शुरू की गई थी और अब तक 9000 केस दर्ज किए गए लेकिन मुश्किल ये है कि हालत नशा में गाड़ियां चला कर जुर्म का इर्तिकाब करने वालों की तफ़सीलात
पोलीस के यहाँ दस्तयाब नहीं है ।

एडीशनल कमिशनर ट्रैफिक पोलीस सी वे आनंद का कहना है कि अब पोलीस ने बार बार हालत -ए-नशा में गाड़ियां चलाने वालों
की तफ़सीलात जमा करने और उन्हें मंज़रे आम पर लाने का फैसला किया है । और उन मालूमात को ट्रैफिक पोलीस के जवानों को दीए गए दस्ती पी डी ए आलात से मरबूत किया जाएगा । बताया जाता है कि मोटर व्हीकल एक्ट के तहत ट्रैफिक पोलीस ब्रीथ अना लाइज़र ( सांसों के ज़रीया अलकहल की मौजूदगी का पता लगाने
वाला आला ) का इस्तिमाल करती है और अगर 100 एम इल्ल ख़ून में अलकहल की सतह 30mg पाई जाय तो उसे हालत नशा ही समझा जाता है । सी वे आनंद का कहना है कि आज कल ट्रैफिक पोलीस हालत-ए- नशा में गाड़ियां चलाने वालों को गिरफ़्तार नहीं करती बल्कि उन की गाड़ियां ज़बत करते हुए कौंसलिंग के लिये तलब किया जाता है और समझा जाता है कि हालत-ए- नशा में गाड़ियां चलाना जान लेवा है इस से ना सिर्फ निशा के आदी शख़्स को बल्कि दीगर लोगों की जानों को ख़तरा पैदा होसकता है ।

इस तरह के ड्राईवरों को कौंसलिंग के बाद एक चालान दिया जाता है और फिर अदालत में पेश किया जाता है । जहां उन पर 3000
रुपय जुर्माना आइद किया जाता है । पोलीस के मुताबिक़ हालत नशा में गाड़ी चलाने वालों की उमरें 20 । 28 साल होती हैं । बाअज़ कमसिन लड़के लड़कियां और ख़वातीन भी हालत -ए-नशा में गाड़ी चलाने के दौरान पकड़ी जाती हैं । हैदराबादट रैफिक पोलीस के ओहदेदारों को पहले ही आलमी इदारा-ए-सेहत डब्ल्यू उच्च ओ
के आलमी रोड सेफ्टी पराजकट 2010 के तहत तरबियत दी जा चुकी है । इस के इलावा ट्रैफिक क़वाइद की ख़िलाफ़ वरज़ीयों के मुर्तक़िब अफ़राद के ख़िलाफ़
तस्वीरी शहादतों केलिए पोलीस ओहदेदारों को डीजीटल स्पैशल कैमरा फ़राहम किये जा रहे हैं ।।

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