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हिंगोनिया गोशाला: गौ रझा पर उठता सवाल, ठाई साल में सरकारी लापरवाही से 27 हजार गायों की मौत

जयपुर। हिंगोनिया गोशाला के बड़े सच का शनिवार को खुलासा हुआ। सरकारी लापरवाही के चलते भाजपा शासन के ढाई वर्षों के दौरान गोशाला में 27 हजार गायों की मौत हो चुकी है। यानी हर माह में 900 या यूं कहें प्रतिदिन 30 गायों ने भूख, प्यास और बीमारी से दम तोड़ा। 

शनिवार को गोशाला प्रशासन से मिले यह आंकड़े देखकर मंत्री राजपाल सिंह शेखावत, मंत्री प्रभुलाल सैनी और एसीबी अधिकारी देखकर चौंक गए। हालांकि दोनों मंत्रियों ने सफाई दी कि कांग्रेस सरकार की तुलना में गायों की मौत का प्रतिशत कम है। मंत्री व अधिकारियों ने इतना जरूर माना कि गोशाला में बाड़े, नाली और सड़क बनाने में लापरवाही बरती गई। इसी से हालात बिगड़े। 
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हिंगोनिया गोशाला में एक पखवाड़े में 500 से ज्यादा गायों की मौत की खबर देशभर में फैलने के बाद शनिवार को मंत्रियों और अफसरों का अमला गोशाला में टूट पड़ा। राज्य के मुख्य सचिव ओपी मीणा, स्वायत्त शासन मंत्री राजपालसिंह शेखावत, पशुपालन मंत्री प्रभुलाल सैनी, पशुपालन विभाग के मुख्य सचिव कुंजीलाल मीणा, संभागीय आयुक्त राजकिशोर सिंह, महापौर निर्मल नाहटा, एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बजरंगसिंह शेखावत गोशाला पहुंचे। कीचड़ में गिरी पड़ी भूखे-प्यासे गोवंश को देख मुख्य सचिव ओपी मीणा ने गोशाला उपायुक्त शेरसिंह लुहाडिया और प्रबंधक रमेशकुमार शर्मा को निलंबित करने के आदेश दिए। दोनों 15 दिन से अवकाश पर हैं। लुहाडिय़ा के निलंबन आदेश कार्मिक विभाग ने शनिवार रात जारी कर दिया। 

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