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हिंदी के प्रसिद्ध कवि कुंवर नारायण सिंह का निधन, दिल्ली में ली अंतिम सांस

हिंदी के प्रसिद्ध कवि कुंवर नारायण सिंह का आज सुबह निधन हो गया है| रिपोर्ट के मुताबिक़ कुंवर नारायण जी पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे| बीमारी से लम्बे संघर्ष के बाद आज उनका निधन हो गया| उन्होंने राजधानी दिल्ली के सीआर पार्क में अंतिम सांस ली| सीआर पार्क में वह अपनी पत्नी और बेटे के साथ रहते थे|प्रसिद्ध कवि कुंवर नारायण सिंह को ज्ञानपीठ पुरस्कार से भी नवाज़ा जा चुका है|

कुंवर नारायण सिंह उत्तर प्रदेश के फैज़ाबाद ज़िले के मूलरूप निवासी हैं| उन्होंने अपने जीवन के 51 साल साहित्य को दिया| तथा साहित्य की दुनिया में सेवा करते रहे| कुंवर नारायण का जन्म 9 सितंबर 1927 को उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में हुआ था। कुंवर नारायण ने लखनऊ यूनिवर्सिटी से इंग्लिश लिटरेचर में पोस्ट ग्रैजुएशन किया था। पढ़ाई के बाद वो परिवार के बिजनेस से जुड़ गए लेकिन ज्यादा समय तक उनका मन इसमें नहीं लगा। वो सत्यजीत रे, आचार्य नरेंद्र देव से काफी प्रभावित हुए और लेखनी में हाथ आजमाया।

उन्होंने 1956 में अपनी पहली क़िताब ‘चक्रव्यूह’ लिखी| इसके साथ उन्होंने कविता कहानी निबंध कला और सिनेमा पर भी लिखा| इन रचनाओं के लिए कुंवर नारायण सिंह को कई सम्मान भी मिले हैं। साल 1995 में उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। वहीं 2005 में उन्हें साहित्य के सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनके साहित्य में योगदान के लिए भारत सरकार ने 2009 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया था।

 

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