Friday , December 15 2017

हिंदुस्तानी तेल बर्दार बहरी जहाज़ ने आलूदगी के मेयारों की कोई ख़िलाफ़वरज़ी नहीं की ,हिंदूस्तान का दावा

इराक़ से ख़ाम तेल की हिंदुस्तान को भेजने वाले तेल बर्दार बहरी जहाज़ को माहौलियाती अंदेशों के तहत ख़लीज-ए-फारिस में ईरान ने रोक दिया है जबकि हिंदुस्तान ने आज दावा किया कि उस बहरी जहाज़ पर आलूदगी के मुक़र्ररा मेयारों की कोई ख़िलाफ़वरज़ी नहीं की गई है।

ईरान ने आज तेल बर्दार बहरी जहाज़ एमिटी देश शांति का दुबारा मुआइना किया जिसे ईरानी पासिदाराना इन्क़िलाब ने ख़लीज-ए-फारिस में रोक कर उसे बंदरगाह बंदर अब्बास भेज‌ दिया था। बहरी जहाज़रानी ओहदेदारों ने और बैनुल अक्वामी सर्वे करने वालों ने बहरी जहाज़ का मुआइना किया। ये जहाज़ सिर्फ़ 9 साल पुराना है और 2004 में तैयार कियागया है। इल्ज़ाम आइद किया गया है कि 30 जुलाई को उस की वजह से आलूदगी पैदा हुई थी।

वज़ारत बहरी जहाज़रानी के एक सीनियर ओहदेदारने कहा कि हक़ीक़त ये है कि तेल बहरी जहाज़ पर उस तारीख़ को ख़ाम तेल भी मौजूद नहीं था जबकि उसे ख़लीज-ए-फारिस में रोका गया था ये जहाज़ हिंदुस्तान की सब से बड़ी बहरी जहाज़रानी कंपनी ऊष्ण् लाइनर शिपिंग कारपोरेशन आफ़ इंडिया की मल्कियत है और उसे इराक़ी बंदरगाह बस्रा से ख़ाम तेल मुंतक़िल करते वक़्त ज़ब्त किया गया था।

हालाँकि हिंदुस्तान ने अपने सिफ़ारतख़ाने बराए ईरान के ज़रिया तेल बर्दार जहाज़ को आजलाना रिहाई के लिए सरगर्म मुज़ाकरात जारी रखे हैं लेकिन कंपनी के ओहदेदार ने कहा कि बहरी जहाज़ के कप्तान से रब्त पैदा किया गया था जिसने कहा कि बहरी जहाज़ बंदर अब्बास में है लेकिन मज़ीद तफ़सीलात का इन्किशाफ़ नहीं किया ये तबदीली उस वक़्त पैदा हुई जबकि हिंदुस्तान ने ईरान से ख़ाम तेल की दरआमदात में कमी करदी है क्योंकि ईरान पर योरोपी यूनियन और अमेरिका ने तहदीदात आइद की हैं।

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