Tuesday , December 19 2017

हिंदुस्तान में इबोला वायरस का पहला मामला

हिंदुस्तान में इबोला वायरस का पहला मामला सामने आया है.

हिंदुस्तान में इबोला वायरस का पहला मामला सामने आया है. लाइबेरिया से दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा 26 साल का नौजवान टेस्ट में पॉजिटिव पाया गया | वज़ारत सेहत के मुताबिक इबोला के  मुतास्सिरा नौजवान को दिल्ली एयरपोर्ट पर ही बनाए गए खुसूसी वार्ड में रखा गया है और फिलहाल फिक्र की कोई बात नहीं है |

मरकज़ी हेल्थ मिनिस्टर जेपी नड्डा का कहना है  कि वह पहले से ही लाइबेरिया से  इलाज़ कराकर आया था, लेकिन वो जब  हिंदुस्तान आए तो उन्हें पहले ही अलग रखा गया था | वज़ीर के मुताबिक इस मरीज को पूरी तरह से डॉक्टरों की निगरानी में रखा जा रहा है. शुरुआती टेस्ट में उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई थीं, लेकिन दोबारा टेस्ट कराए जाने पर रिपोर्ट्स पॉजिटिव आई थीं. 90 दिनों तक उन्हें आइसोलेशन में रखा जाएगा |

हेल्थ मिनिस्टर के मुताबिक फिक्र की कोई बात नहीं है. हम सभी जरूरी कदम उठा रहे हैं. लेकिन एहतियात बरतनी होगी |


ऐसे फैलता है इबोला वायरस:

यह बीमारी खास तौर पर चमगादड़ों से फैलती है. चमगादड़ इसे बंदरों तक पहुंचाते है और बंदर इंसानों तक. यह वायरस सबसे पहले गुएना नाम के एक मुल्क में पाया गया था. यह बीमारी इंसानी जिस्म में आंख, नाक और मुंह के जरिए अपना रास्ता बनाते हैं |

अफ्रिकी मुल्क लाइबेरिया, सिएरा और लियोन आदी में भी वायरस का ज़्यादा कहर बरपा रहा है. नाइजीरिया भी इस वायरस के चपेट में आ चुका है. इसके असर से कई अफ्रिकी मुल्को में इमरजेंसी लागू कर दी गई है |

वायरस जिस्म में दाखिल होने के 21 दिन बाद असर दिखाना शुरू करता है. इबोला से मुतास्सिर  90% फीसदी मरीजों की मौत हो जाती है. एक तरफ जहां एड्स तीन हफ्ते से 20 साल में असर दिखाता वहीं इवोला 15 दिनों में भी जानलेवा साबित होता है |

इस बीमारी से कैसे बचा जाए:

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस बीमारी के लिए कोई दवा मौजूद नहीं है. अब सबसे जरूरी बात यह है कि अगर दवा  दस्तयाब  नहीं है तो इस बीमारी से कैसे बचा जाए. तो आप यह जानकर अपना बचाव कर सकते हैं कि यह बीमारी फैलती कैसे है?

इबोला हवा से नहीं फैलती पर यह मरीज के राबिते में आने जैसे उसके पसीने, खून या उसे छूने से हो सकती है. इससे बचाव का सबसे अच्छा तरीका यह है कि मरीज से जितनी हो सके दूरी बरती जाए. यहां तक की डॉक्टरों को भी अपना पूरा जिस्म ढ़क कर ही इलाज करना चाहिए |

बीमारी के अलामत (Symptoms)  में बुखार, अज़लात (Muscles) में दर्द जैसे अलामत शामिल हैं. बीमारी की शिद्दत को देखते हुए  तंज़ीम (WHO) ने भी इसे आलमी आफत ऐलान कर दिया है. ऐसे में जितना हो सके आप भी एहतियात बरतें |

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