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हिंदूस्तानी अफ़्वाज में रोबोटिक सिपाहीयों की शमूलीयत

चेन्नई, १३ दिसम्बर:(एजैंसीज़) जंग के मैदान में मुल़्क की हिफ़ाज़त की ज़िम्मेदारी बहुत जल्द रोबोट (मशीनी सिपाहीयों) के हाथों में होगी। मुस्तक़बिल में हिंदूस्तानी अफ़्वाज की मदद के मक़सद के तहत सीकोरीटी इदारों और तरक़्क़ीयाती तंज़ीम (डर

चेन्नई, १३ दिसम्बर:(एजैंसीज़) जंग के मैदान में मुल़्क की हिफ़ाज़त की ज़िम्मेदारी बहुत जल्द रोबोट (मशीनी सिपाहीयों) के हाथों में होगी। मुस्तक़बिल में हिंदूस्तानी अफ़्वाज की मदद के मक़सद के तहत सीकोरीटी इदारों और तरक़्क़ीयाती तंज़ीम (डर ऑडी ओ) रोबोटिक अफ़्वाज तैयार करने में मसरूफ़ है।

तंज़ीम के डायरैक्टर जनरल, वज़ीर-ए-दिफ़ा के शीरवी के सारस्वत ने बताया कि तंज़ीम अफ़्वाज के लिए रोबोटिक सिपाही तैय्यार करने में लगा हुआ है। एक प्रोग्राम के बाद यहां सहाफ़ीयों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि हम ऐसे रोबोटिक अफ़्वाज को तैय्यार करने में मसरूफ़-ए-अमल हैं जो इंसानी फ़ौजों की ही तरह काम कर सकें।

सारस्वत ने बताया कि इस तरह के रोबोट तैय्यार करने के लिए निहायत फ़आल और तेज़ तख़लीक़ी दिमाग़ और आदाद-ओ-शुमार की इस्तिदाद तैय्यार करने की ज़रूरत है जिस के लिए डी आर डी ए कोशां है। उन्हों ने बतायाकि पहाड़ी और पथरीले रास्तों पर काफ़ी वज़नी अश्या ले जाने के लिए फ़ौज को काफ़ी मशक़्क़त करनी पड़ती है।

ऐसे में डर आर डी ओ फ़िलवक़्त ऐसे रोबोट बनाने के अमल में मसरूफ़ है जो मुश्किल राहों पर बोझ ले जाने में फ़ौजों की मदद करसकेगा । इस से क़बल डी आर डी ओ बम और दीगर धमाको अशीया का पता लगाने वाली रोबोटिक मशीन दकछ की तख़लीक़ अमल में ला चुका है।

यहां इस बात का तज़किरा ज़रूरी है कि सिर्फ अफ़्वाज ही नहीं बल्कि ज़िंदगी के हर शोबा में अब रोबोट की ज़रूरत महसूस की जाने लगी है। हॉस्पिटल्स में भी मरीज़ की ख़िदमात केलिए अब रोबोटस को इस्तिमाल किया जा रहा है।

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