Friday , November 24 2017
Home / India / हिंदूस्तान का ग़ैरमामूली कसीर सक़ाफ़्ती समाज

हिंदूस्तान का ग़ैरमामूली कसीर सक़ाफ़्ती समाज

ये बयान करते हुए कि कसीर सक़ाफ़्ती समाज हनूज़ बाज़ ममालिक जैसे लड़ाई ज़दा शाम में एक मसला है, साबिक़ बर्तानवी वज़ीर-ए-आज़म टोनी बलेर ने आज हिंदूस्तान की ग़ैरमामूली समाज के तौर पर सताइश की जिसमें तमाम नौईयत के मज़ाहिब हैं और उसे अक़ीदा के ताल्ल

ये बयान करते हुए कि कसीर सक़ाफ़्ती समाज हनूज़ बाज़ ममालिक जैसे लड़ाई ज़दा शाम में एक मसला है, साबिक़ बर्तानवी वज़ीर-ए-आज़म टोनी बलेर ने आज हिंदूस्तान की ग़ैरमामूली समाज के तौर पर सताइश की जिसमें तमाम नौईयत के मज़ाहिब हैं और उसे अक़ीदा के ताल्लुक़ से सीखने के लिए मस्हूर कुन मुक़ाम क़रार दिया।

बलेर जो 1997 से एक दहिय तक सलतनत मुत्तहदा के वज़ीर-ए-आज़म रहे, उन्होंने निशानदेही की कि अक़ीदा के तईं वाबस्तगी ज़बरदस्त अच्छाई के साथ साथ ज़बरदस्त ग़लती की मूजिब बन सकती है और कहाकि इस दुनिया में ज़्यादा तर पेचीदा मसाइल के मज़हबी पहलू हैं।

टोनी बलेर फ़ानडेशन की फ़ेथ ऐंड ग्लोबलाइज़ेशन इनीशईटीव के साथ शामिल होने के लिए बनारस हिंदू यूनीवर्सिटी के साथ मुआहिदा पर दस्तख़त के बाद अपना कलीदी ख़ुतबा देते हुए वेटरन लेबर लीडर ने हिंदूस्तान के कसीर सक़ाफ़्ती और कसीर मज़हबी समाज को सराहा।

उन्होंने कहा कि हिंदूस्तान ग़ैरमामूली समाज है। इसमें तमाम तर मज़ाहिब हैं और ये मुस्लिम आबादी वाले बड़े ममालिक में से है और ये मज़हब के ताल्लुक़ से सीखने और ग़ौर करने के लिए मस्हूर कुन मुक़ाम है।

TOPPOPULARRECENT