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हिंदूस्तान की आलमी ताक़त के तौर पर तरक़्क़ी में अमरीकी मफ़ाद (स्वार्थ) मुज़मिर(मौजूद)

ये निशानदेही करते हुए कि अमरीकी सदर (राष्ट्रपती) बराक ओबामा हिंदूस्तान को अपनी अहम तरीन ख़ारिजा पॉलीसी (विदेश नीति) तरजीहात में शामिल समझते हैं , व्हाइट हाउस के एक सीनियर ओहदेदार ने कहा है कि अमरीका का नई दिल्ली के आलमी ताक़त की हैसियत से अभराउ में ग़ैरमामूली मफ़ाद (स्वार्थ) मुज़मिर(मौजूद) है।

सदर (राष्ट्रपती) ओबामा हिंदूस्तान के साथ तवील मुद्दती (लम्बे समय तक) आलमी शराकतदारी उस्तिवार करने के पाबंद अह्द हैं, और वो 21 वीं सदी की एक ताक़त की हैसियत से हिंदूस्तान के बढ़ते हुए रोल को तस्लीम करते हैं।

सदर (राष्ट्रपती) ओबामा हिंदूस्तान को अपनी आला ख़ारिजा पॉलीसी (विदेश नीति) तरजीहात में शामिल समझते हैं और उसे बाहमी (द्विपक्षीय) रिश्तों में काफ़ी अहम दर्जा देते हैं। माईकल फ़र्र वुमन नायब क़ौमी सलामती (सिक्योरिटी) मुशीर (रक्षा सलाहकार) बराए बैन अल-अक़वामी (अंतर्राष्ट्रीय) मआशी उमूर ने यू एस इंडिया बिज़नस कौंसिल से अपने ख़िताब में ये बात कही ।

उन्हों ने तीसरे हिंदूस्तान , अमरीका स्ट्रेटेजिक मुज़ाकरात से क़ब्ल हिंदूस्तान के बारे में व्हाइट हाउस की राय पेश करते हुए कहा कि हमारा हिंदूस्तान के आलमी ताक़त के तौर पर उभरने में काफ़ी मफ़ाद (स्वार्थ) शामिल है। हिंदूस्तान बिलाशुबा दुनिया की सब से बड़ी जम्हूरियत है और अनक़रीब शायद सब से ज़्यादा आबादी वाला मुल्क भी बनने वाला है।

इस की मईशत (अर्थ व्यवस्था) इसी शरह पर आगे बढ़ रही है जिस से सनअत याफ़ता अक़्वाम का गुमान होता है । और इस में आलमी मआशी तरक़्क़ी का एक अहम आला कार बनने की सलाहियत भी है ।

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