हिंदूस्तान की 60 साला जमहूरियत को अब्दुलकलाम के पासिंग मार्क्स

हिंदूस्तान की 60 साला जमहूरियत को अब्दुलकलाम के पासिंग मार्क्स

नई दिल्ली 16 मार्च : साबिक़ सदर जमहूरिया ए पी जे अब्दुलकलाम ने 60 साला क़दीम हिंदूस्तानी जमहूरियत को आज पासिंग मार्क्स (कामयाबी के निशानात) देते हैं। डाक्टर अब्दुलकलाम ने छः दहाईयों क़दीम हिंदूस्तानी जमहूरियत को 10 के मिनजुमला 5 मार्क्स तो दिए हैं ताहम ये ख्याल‌ भी ज़ाहिर किया कि शहरियों को बाइख़तियार बनाने से मुताल्लिक़ इसका बुनियादी उसूल बदस्तूर जारी रखा जाय ।

डाक्टर अब्दुलकलाम ने वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह की मालियाती महारत की तारीफ‌ की और जल्द फ़ैसले करने केलिए साबिक़ वज़ीर-ए-आज़म अटल बिहारी वाजपाई की सलाहियतों की तारीफ़ की। साबिक़ दर जमहूरिया आज यहां इंडिया टूडे एनकेलयो के 13 वीं सैशन में लकचर दे रहे थे जिस का उनवान जमहूरियत की दुबारा ईजाद : नौजवानों का तजुर्बा था।

इस सवाल पर कि आया हिंदूस्तानी जमहूरियत की कारकर्दगी को आप कुल‌ कितने नम्बर‌ देंगे ? उन्होंने जवाब दिया कि 1947 से 2013-ए-तक जब में देखता हूँ हमारे पास एक दस्तूर है जो जमहूरियत को आगे ले जा रहे है । आप के सवाल के जवाब में में हिंदूस्तानी जमहूरियत की कारकर्दगी को पाँच निशानात देता हूँ ।

मज़ीद ये पूछे जाने पर कि आप के जवाब से बहुत अच्छे मुज़ाहिरे का इशारा नहीं मिले है । डाक्टर अब्दुलकलाम ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि ठीक है बस पासिंग मार्क्स। एक और सवाल पर जिस में उन्हें अपने पसंद के क़ाइद का नाम बताने की ख़ाहिश की गई थी। डाक्टर ए पी जे अब्दुलकलाम ने जवाब दिया कि मनमोहन सिंह जी शोबा फ़ीनानस के माहिर हैं।

इस शोबा में उनकी महारत पर कोई शुबा नहीं है । चुनांचे में इक़तिसादीयात और दीगर तमाम शोबों में उनके एहसासात, तजुर्बात और अहम मसाइल पर उनकी तजावीज़ की में क़दर करता हूँ और उनका एहतिराम करता हूँ। वाजपाई बहुत जल्द फ़ैसले करने की सलाहियत के हामिल थे।

ये दो अहम फ़र्क़ हैं। में समझता हूँ कि ये दोनों ही क़ाइदीन क़ाबिल-ए-सिताइश हैं। डाक्टर कलाम ने याद दिलाया कि इन दोनों के दौर में वो बहैसियत सदर जमहूरिया फ़राइज़ अंजाम दे चुके हैं। डाक्टर कलाम ने अपने ख़िताब के दौरान मज़ीद कहा कि नौजवानों के बाइख़तियार जेहन किसी मुल्क-ओ-कोमिक से बड़ी ताक़त होते हैं और किसी जमहूरियत में वो मुल्क की तेज़ रफ़्तार तरक़्क़ी चाहते हैं

साबिक़ सदर ने कहा कि कोई भी मुल्क-ओ-क़ौम किसी भी सयासी निज़ाम से बरतर-ओ-बालातर होते हैं। चुनांचे एक ऐसा मुआशरा फ़रोग़ दिया जाय तो तहज़ीब-ओ-एतिक़ाद और मिज़ाज के फ़र्क़ को बर्दाश्त और क़बूल करसकता है। जमहूरियत में हर शहरी को अपनी इन्फ़िरादियत और शख़्सी एहतिराम के साथ ज़िंदगी गुज़ारने का हक़ हासिल है।

इबतिदाई तालीमी शोबा की इस्लाह(सुधार) पर डाक्टर कलाम ने कहा कि बच्चों को इख़तिरा पसंद टीचर्स, निसाब और स्कूलस की ज़रूरत होती है जो फ़िलहाल कहीं भी नहीं है । उन्होंने कहा कि एक कामयाब लीडर इसी कामयाबी का क्रेडिट अपनी टीम को देता है और नाकामी की ज़िम्मेदारी अपने सर लेता है।

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