Monday , December 18 2017

हिंदूस्तान की 60 साला जमहूरीयत को अब्दुल कलम के पासिंग मार्क्स

नई दिल्ली । 15 मार्च (पी टी आई) साबिक़ सदर जमहूरीया ए पी जे अब्दुल कलम ने 60 साला क़दीम हिंदूस्तानी जमहूरीयत को आज पासिंग मार्क्स (कामयाबी के निशानात) देते हैं। डाक्टर अब्दुल कलम ने छः दहाईयों क़दीम हिंदूस्तानी जमहूरीयत को 10 के मिनजुमला

नई दिल्ली । 15 मार्च (पी टी आई) साबिक़ सदर जमहूरीया ए पी जे अब्दुल कलम ने 60 साला क़दीम हिंदूस्तानी जमहूरीयत को आज पासिंग मार्क्स (कामयाबी के निशानात) देते हैं। डाक्टर अब्दुल कलम ने छः दहाईयों क़दीम हिंदूस्तानी जमहूरीयत को 10 के मिनजुमला 5 मार्क्स तो दिए हैं ताहम ये तास्सुर भी ज़ाहिर किया कि शहरीयों को बाइख़तियार बनाने से मुताल्लिक़ इस का बुनियादी उसूल बदस्तूर जारी रखा जाये ।

डाक्टर अब्दुल कलम ने वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह की मालीयाती महारत की सताइश की और जल्द फ़ैसले करने केलिए साबिक़ वज़ीर-ए-आज़म अटल बिहारी वाजपाई की सलाहीयतों की तारीफ़ की। साबिक़ दर जमहूरीया आज यहां इंडिया टूडे एनक्लेव के 13 वीं सैशन में लेक्चर दे रहे थे जिस का उनवान जमहूरीयत की दुबारा ईजाद : नौजवानों का तजुर्बा था।

इस सवाल पर कि आया हिंदूस्तानी जमहूरीयत की कारकर्दगी को आप के मिनजुमला कितने निशानात देंगे? उन्होंने जवाब दिया कि 1947 से 2013 तक जब में देखता हूँ हमारे पास एक दस्तूर है जो जमहूरीयत को आगे ले जा रहा है। आप के सवाल के जवाब मे में हिंदूस्तानी जमहूरीयत की कारकर्दगी को पाँच निशानात देता हूँ।

मज़ीद ये पूछे जाने पर कि आप के जवाब से बहुत अच्छे मुज़ाहिरे का इशारा नहीं मिला है। डाक्टर अब्दुल कलम ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि ठीक है बस पासिंग मार्क्स। एक और सवाल पर जिस में उन्हें अपने पसंद के क़ाइद का नाम बताने की ख़ाहिश की गई थी। डाक्टर ए पी जे अब्दुल कलम ने जवाब दिया कि मनमोहन सिंह जी शोबा फ़ीनानस के माहिर हैं।

इस शोबा में उनकी महारत पर कोई शुबा नहीं है। चुनांचे में इक़तिसादीयात और दीगर तमाम शोबों में उन के एहसासात, तजुर्बात और अहम मसाइल पर उन की तजावीज़ की में क़दर करता हूँ और उनका एहतिराम करता हूँ। वाजपाई बहुत जल्द फ़ैसले करने की सलाहीयत के हामिल थे।

ये दो अहम फ़र्क़ हैं। में समझता हूँ कि ये दोनों ही क़ाइदीन क़ाबिल-ए-सताइश हैं। डाक्टर कलाम ने याद दिलाया कि इन दोनों के दौर में वो बहैसीयत सदर जमहूरीया फ़राइज़ अंजाम दे चुके हैं। डाक्टर कलाम ने अपने ख़िताब के दौरान मज़ीद कहा कि नौजवानों के बाइख़तियार ज़हन किसी मुल्क-ओ-कोमिक युसब से बड़ी ताक़त होते हैं और किसी जमहूरीयत में वो मुल्क की तेज़ रफ़्तार तरक़्क़ी चाहते हैं।

साबिक़ सदर ने कहा कि कोई भी मुल्क-ओ-क़ौम किसी भी सियासी निज़ाम से बरतर-ओ-बालातर होते हैं। चुनांचे एक एसा मुआशरा फ़रोग़ दिया जाये तो तहज़ीब-ओ-एतिक़ाद और मिज़ाज के फ़र्क़ को बर्दाश्त और क़बूल करसकता है। जमहूरीयत में हर शहरी को अपनी इन्फ़िरादियत और शख़्सी एहतिराम के साथ ज़िंदगी गुज़ारने का हक़ हासिल है।

इबतिदाई तालीमी शोबा की इस्लाह पर डाक्टर कलाम ने कहा कि बच्चों को इख़तिरा पसंद टीचर्स, निसाब और स्कूल्स की ज़रूरत होती है जो फ़िलहाल कहीं भी नहीं है । उन्होंने कहा कि एक कामयाब लीडर इसी कामयाबी का क्रेडिट अपनी टीम को देता है और नाकामी की ज़िम्मेदारी अपने सर लेता है।

TOPPOPULARRECENT