Tuesday , January 23 2018

हिंदूस्तान के साथ बेहतर रवाबित (मेल मिलाप) की ख़ाहिश

वाशिंगटन, २३ सितंबर (पी टी आई) हिंदूस्तान के साथ बेहतर रवाबित ( मिल मिलाप) उस्तिवार करने में गुज़श्ता 6 दहों के दौरान मनफ़ी रुजहानात को नजर अंदाज़ करते हुए तमाम उमोर बिशमोल जम्मू-ओ-कश्मीर पर एतिमाद की बहाली के लिए इक़दामात ( कार्यनिष्

वाशिंगटन, २३ सितंबर (पी टी आई) हिंदूस्तान के साथ बेहतर रवाबित ( मिल मिलाप) उस्तिवार करने में गुज़श्ता 6 दहों के दौरान मनफ़ी रुजहानात को नजर अंदाज़ करते हुए तमाम उमोर बिशमोल जम्मू-ओ-कश्मीर पर एतिमाद की बहाली के लिए इक़दामात ( कार्यनिष्पादन) का कलीदी रोल रहा।

वज़ीर उमोर ख़ारिजा (foreign minister) पाकिस्तान हिना रब्बानी खर ने ये बात कही और उन्हों ने बताया कि दोनों ममालिक (देशों) के माबैन ( बीच) तिजारती ( ब्यापार से संबंधित) रवाबित (मेल मिलाप) की उस्तिवारी इसी सिम्त में एक अहम क़दम है। अमरीकन थिंक टैंक से ख़िताब के दौरान हिना रब्बानी खर ने कहा कि पाकिस्तान की सियोल हुकूमत गुज़श्ता चार साल से यही कोशिश करती आ रही है।

उन्हों ने कहा ये बिलकुल वाज़िह ( स्पष्ट) है कि जब तक हम अपने पड़ोसीयों के साथ सरहद पर अमन क़ायम नहीं करेंगे तब तक अमन का मक़सद पूरा नहीं होगा। चुनांचे पड़ोसी ममालिक के साथ रवाबित के मुआमला में पुरानी ज़हनीयत ( सोंच) को तबदील करना ज़रूरी है।

उन्होंने कहा कि हिंदूस्तान और पाकिस्तान ने गुज़श्ता 65 साल के दौरान मनफ़ी रुजहानात को ज़्यादा तर्जीह ( प्रधानता) दी। इस के साथ साथ कश्मीर, सियाचिन और सरक्रीक के ताल्लुक़ से पुरानी ज़हनीयत को तबदील करने का भी वक़्त आ गया है।

जम्मू-ओ-कश्मीर एक अहम और संगीन मसला है। इस के साथ साथ सियाचिन, सरक्रीक तनाज़आत भी काफ़ी संगीन हैं लेकिन ऐसा कौन सा रास्ता होगा जिस के ज़रीया हम इन मसाइल ( समस्याओं) को हल कर पाएंगे? क्या इस के लिए जंग ज़रूरी है? या फिर एक दूसरे के ख़िलाफ़ मनफ़ी मुहिम ( अभियान) के ज़रीया हम आने वाली नसलों के लिए ये मसला यूं ही छोड़ जाएंगे।

साबिक़ में ( पहले) ऐसा हो चुका है। चुनांचे अब वो समझते हैं कि इस का जवाब बहुत ही आसान और नफे में है। इन मसाइल को हल करने का बेहतरीन रास्ता एक दूसरे के साथ एतिमाद ( एकता) की बहाली, ज़हनीयत की तबदीली है। इस के साथ साथ हमें मुज़ाकरात (आपसी बातचीत) की मेज़ पर बैठ कर उन मसाइल का देरीना ( बिना विलम्ब) और मुस्तक़िल (स्थायी/ अटल) हल बातचीत के ज़रीया तलाश करना होगा।

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